# खामेनेई के जनाजे में लाल झंडे और गूंजते किल ट्रंप के नारे: क्या ईरान की नई जंग की है तैयारी?
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तेहरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक विदाई समारोह नहीं, बल्कि एक शक्ति प्रदर्शन बन गया है। सड़कों पर उमड़ी भीड़ में काले कपड़ों के बीच लहराते लाल झंडे पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं।

लाल झंडे: मातम नहीं, इंतकाम का ऐलान आमतौर पर शोक के लिए काले झंडों का इस्तेमाल होता है, लेकिन ईरान में इस बार लाल झंडे खून के बदले खून का प्रतीक हैं। तेहरान यूनिवर्सिटी के रिसर्च फेलो मोहम्मद इस्लामी के मुताबिक, ये झंडे ईरानी जनता का सरकार को सीधा संदेश हैं—जो भी इस मौत के पीछे है, उसे बख्शा न जाए।

डेथ टू अमेरिका और ट्रंप का नाम सड़कों पर एक बार फिर डेथ टू अमेरिका के नारे गूंज उठे हैं। भीड़ के हाथों में किल ट्रंप के पोस्टर साफ इशारा कर रहे हैं कि ईरान का आक्रोश सीधे अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर केंद्रित है। खामेनेई की मौत को ईरान एक सुनियोजित हमला मान रहा है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

अतीत का योद्धा और भविष्य की नीति खामेनेई को ईरान एक ऐसे नेता के रूप में याद कर रहा है जो कभी मोर्चे से पीछे नहीं हटा। इस अंतिम संस्कार के जरिए ईरानी नेतृत्व दुनिया को दो कड़े संदेश दे रहा है: पहला, खामेनेई का कद ईरानी इतिहास में सर्वोच्च था। दूसरा, उनकी आक्रामक नीतियां उनके जाने के बाद भी पूरी सख्ती से जारी रहेंगी।

समझौते पर संकट के बादल 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच नौवहन स्वतंत्रता और फंड रिलीज को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। अब बदले की इस आग में उस समझौते का भविष्य अधर में है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सत्ता का नया समीकरण और जनता का भारी दबाव, अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत को पटरी से उतार सकता है।

क्या होगा अगला कदम? ईरान की नई लीडरशिप के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उन्हें देश के भीतर स्थिरता कायम करनी है, तो दूसरी ओर बदले की इस भावना को संभालना है। अगर ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की, तो मध्य-पूर्व में तनाव का एक नया और खतरनाक अध्याय शुरू हो सकता है। फिलहाल, तेहरान से आ रही तस्वीरें किसी बड़े सैन्य या कूटनीतिक बदलाव का संकेत दे रही हैं।

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