केतन अग्रवाल केस के बाद गूंजी संसद: क्या अब भारत में बनेगा राष्ट्रीय पुरुष आयोग ?
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पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की रहस्यमयी मौत का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। इस घटना ने देश में पुरुषों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है। केतन की मंगेतर सिया गोयल द्वारा रची गई साजिश के खुलासे के बाद, अब हर तरफ से राष्ट्रीय पुरुष आयोग (National Commission for Men) के गठन की मांग उठने लगी है।

संसद में उठी बुलंद आवाज

राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक मित्तल ने शून्यकाल के दौरान केतन अग्रवाल मामले का जिक्र करते हुए इस गंभीर मुद्दे को संसद में उठाया। मित्तल ने स्पष्ट कहा कि केतन का मामला इस बात का कड़वा सच है कि पुरुष भी प्रताड़ना का शिकार होते हैं। उन्होंने संसद में नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल पेश करने की वकालत करते हुए कहा कि हर पीड़ित को कानून के तहत समान सुरक्षा और मदद मिलनी चाहिए।

कौन हैं डॉ. अशोक मित्तल?

सांसद अशोक मित्तल का व्यक्तित्व एक राजनेता के साथ-साथ एक शिक्षाविद का भी है। वे पंजाब के जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक और चांसलर हैं। अप्रैल 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचने वाले मित्तल ने हाल ही में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। वे नीति-निर्माण और शिक्षा क्षेत्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

क्यों जरूरी है पुरुषों के लिए अलग आयोग?

भारत में पुरुष अधिकार संगठनों का लंबे समय से तर्क है कि दहेज विरोधी और घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल कई बार हथियार की तरह किया जाता है। अक्सर प्राथमिक जांच के बिना ही पूरे परिवार को मुकदमों में फंसा दिया जाता है। सामाजिक बदनामी और कानूनी शिकंजे के डर से कई पुरुष गंभीर अवसाद का शिकार हो रहे हैं।

क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े इस दर्दनाक सच्चाई को बयां करते हैं। देश में आत्महत्या करने वाले विवाहित पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। इन आत्महत्याओं के पीछे वैवाहिक कलह, बेवजह के मुकदमों का डर और पारिवारिक तनाव मुख्य कारण बताए जाते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एडवोकेट शांतनु शुक्ला के अनुसार, न्याय तभी निष्पक्ष है जब वह लिंग के आधार पर भेदभाव न करे। उनका कहना है कि एक ऐसा आयोग होना चाहिए जो किसी भी पुलिसिया कार्रवाई से पहले आरोपों की प्रारंभिक जांच करे। इससे निर्दोष पुरुषों और उनके बुजुर्ग माता-पिता को झूठे मुकदमों में फंसने से बचाया जा सकेगा।

केतन केस: क्या सिया उगलेगी सच?

फिलहाल पुणे पुलिस केतन अग्रवाल मर्डर केस की तह तक जाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। पुलिस ने अब सिया गोयल का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मांगी है। केतन की मौत के पीछे किस हद तक साजिश रची गई थी और इसके पीछे की असली वजह क्या थी, यह अब इस वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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