टीएमसी दफ्तर पर बागी गुट का कब्जा, ममता बनर्जी के सामने अस्तित्व का बड़ा संकट
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कोलकाता की सियासत में आज एक बड़ा भूचाल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हेडक्वार्टर (मेट्रोपॉलिटन बिल्डिंग) पर बागी गुट ने धावा बोलकर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया है। पार्टी के अंदर छिड़ी वर्चस्व की यह लड़ाई अब सड़क पर आ चुकी है।

बागी गुट का शक्ति प्रदर्शन विपक्ष के नेता रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व में करीब 60 बागी विधायकों ने टीएमसी दफ्तर पहुंचकर वहां एक संक्षिप्त बैठक की। मीटिंग खत्म होते ही उन्होंने दफ्तर के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। बागी गुट ने दावा किया है कि असली टीएमसी वे ही हैं और पार्टी कार्यालय पर उनका ही कानूनी अधिकार है।

कुणाल घोष और समर्थकों का हंगामा बागी गुट के इस कदम के बाद ममता बनर्जी के वफादार नेता कुणाल घोष अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। दफ्तर के बाहर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की खबरें हैं, जिससे कोलकाता में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

पूर्व नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं से कटा बागी विधायक संदीपन साहा ने बगावत के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि पार्टी का पुराना नेतृत्व जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं से पूरी तरह कट चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। साहा का कहना है कि वे टीएमसी को उसकी मूल विचारधारा पर वापस लाना चाहते हैं, जहां सामूहिक निर्णय लिए जाएं।

बीजेपी का तंज: सिर्फ भतीजा साथ टीएमसी के इस अंदरूनी घमासान पर बीजेपी ने ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि टीएमसी अब बंगाल में महज इतिहास बनकर रह गई है। उन्होंने दावा किया कि सांसद, विधायक, मेयर और पंचायत सदस्य—सब ममता का साथ छोड़ चुके हैं। हुसैन ने तंज कसते हुए कहा, उनके साथ अब सिर्फ उनके भतीजे बचे हैं। ममता बनर्जी अल्पमत में हैं।

चुनाव आयोग की भूमिका पर निगाहें फिलहाल, यह पूरा मामला चुनाव आयोग की दहलीज पर पहुंच चुका है। आयोग को यह तय करना है कि टीएमसी का असली वारिस कौन है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई यह फूट अब पार्टी के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

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