अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार: तेहरान से मशहद तक शक्ति प्रदर्शन की तैयारी, भारत-पाकिस्तान के प्रतिनिधि पहुंचे
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार पूरे देश में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। 37 वर्षों तक शासन करने वाले खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मोसाला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। यह स्थान ईरान की सबसे महत्वपूर्ण औपचारिक जगहों में से एक है।

अंतिम संस्कार का रूट और भव्यता सरकारी अधिकारियों के अनुसार, शनिवार से शुरू होकर यह प्रक्रिया 9 जुलाई तक चलेगी। पार्थिव शरीर को तेहरान के बाद इराक के नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा। अंत में, 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में इमाम रजा के मजार के पास उन्हें दफनाया जाएगा। इसे ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार माना जा रहा है।

भारत और पाकिस्तान की उपस्थिति इस शोक सभा में दुनिया भर के नेताओं का जमावड़ा लगा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर तेहरान पहुंच चुके हैं। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा के साथ-साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

क्या यह एक जनमत संग्रह है? ईरान की सत्ताधारी सरकार इस अंतिम संस्कार को केवल शोक तक सीमित नहीं रखना चाहती। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इसे इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति जनता की निष्ठा के प्रदर्शन के तौर पर पेश कर रही है। सत्ताधारी धड़े को उम्मीद है कि 1.5 से 2 करोड़ लोगों की भीड़ इकट्ठा कर वे अपनी गिरती साख और आंतरिक तनाव के बीच अपनी ताकत का अहसास कराएंगे।

अंतिम संस्कार में चार महीने की देरी क्यों? इस्लामिक परंपराओं के विपरीत, खामेनेई की मौत के चार महीने बाद यह अंतिम संस्कार हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के लगातार खतरों के बीच शव को धार्मिक नियमों के तहत रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था। शिया कानून के तहत सर्वोच्च नेता के लिए ऐसी विशेष छूट दी जा सकती है।

खुमैनी के जनाजे से क्यों हो रही तुलना? आज का माहौल 1989 में क्रांति के जनक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार से बिल्कुल अलग है। खुमैनी के विदाई समारोह में उमड़ी भीड़ बेकाबू थी और भावनाएं चरम पर थीं। इस बार, ईरान में सन्नाटा और तनाव अधिक है। साथ ही, उत्तराधिकारी के रूप में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई की स्थिति भी अनिश्चित है, जो खुद हमले में घायल होने के कारण इस जनाजे में शामिल नहीं हो रहे हैं।

बदलता ईरान और आंतरिक चुनौतियां एक तरफ ईरान सरकार इसे राष्ट्रीय एकता के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी तरफ आर्थिक तंगी और दमन से त्रस्त ईरानी जनता में भारी नाराजगी है। खामेनेई के जाने के बाद, इस्लामिक रिपब्लिक अपने 47 साल के इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। अब देखना यह है कि यह अंतिम संस्कार सरकार को वह वैधता दिला पाएगा या नहीं, जिसकी उसे इस नाजुक मोड़ पर तलाश है।

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