# मेघालय हनीमून मर्डर केस: पुलिस की बड़ी चूक से बची रही आरोपी! सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर क्यों नहीं लगाई रोक?
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देश के बहुचर्चित मेघालय हनीमून मर्डर केस ने एक नया और हैरान करने वाला मोड़ लिया है। अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह फैसला तब आया जब मेघालय पुलिस की एक गंभीर लापरवाही के कारण आरोपी 10 महीने जेल में बिताने के बाद बाहर निकल चुकी है।

रिहाई हो चुकी थी, इसलिए कोर्ट ने दिखाई नरमी

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने स्पष्ट किया कि चूंकि सोनम रघुवंशी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी हैं, इसलिए फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश को पलटना उचित नहीं है। हालांकि, अदालत ने सोनम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ किया कि यह राहत अंतिम नहीं है और मामले की सुनवाई ट्रायल की स्थिति के आधार पर आगे बढ़ेगी।

पुलिस की कॉपी-पेस्ट वाली पोल खुली

इस मामले में मेघालय पुलिस की किरकिरी तब हुई जब कोर्ट में दस्तावेजों की हकीकत सामने आई। ट्रायल कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो, केस डायरी और चेकलिस्ट में हत्या की सही धारा ही नहीं लिखी। दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की गलत धाराएं दर्ज थीं।

हैरानी की बात यह रही कि कागजी कार्रवाई में सोनम को सशस्त्र बलों से भागा हुआ भगोड़ा (Deserter) तक लिख दिया गया, जबकि उसका इससे कोई लेना-देना नहीं था। हाई कोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की घोर लापरवाही और बिना दिमाग लगाए की गई कार्रवाई करार दिया।

सरकार की दलील, पर तकनीकी गलती भारी पड़ी

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सोनम पर पति की हत्या का बेहद गंभीर आरोप है। उन्होंने पुणे के फोर्ट मर्डर केस का हवाला देते हुए आग्रह किया कि केवल तकनीकी और क्लर्कल गलतियों के आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन, हाई कोर्ट के कड़े रुख और पुलिस की बार-बार दोहराई गई गलतियों ने सरकार के पक्ष को कमजोर कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

इंदौर के राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई को हुई थी। 20 मई को वे हनीमून के लिए मेघालय के सोहरा गए, जहां से वे रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। 2 जून को राजा का शव मिला और 9 जून को सोनम व उसके कथित प्रेमी राज सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार किया गया।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर तुरंत रोक भले न लगाई हो, लेकिन पुलिस की कार्यशैली पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट अब इस मामले में ट्रायल की प्रगति और जमीनी हकीकत की गहराई से समीक्षा करेगा। 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई इस हाई-प्रोफाइल केस के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है।

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