खामेनेई का अंतिम सफर: 14 माह की पोती का ताबूत और अमेरिका-इजरायल को दो करोड़ लोगों का सीधा संदेश
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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो चुकी हैं। 9 जुलाई को प्रस्तावित उनका अंतिम संस्कार हालिया इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन बनने जा रहा है। ईरान इस पूरी प्रक्रिया को सिर्फ एक शोक सभा नहीं, बल्कि अपनी शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहा है।

अंतिम यात्रा: संदेश का माध्यम खामेनेई का जनाजा ईरान और इराक के पांच प्रमुख शहरों से गुजारा जाएगा। इस आयोजन का समय काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस की 250वीं वर्षगांठ के करीब है। तेहरान इसके जरिए वाशिंगटन और तेल अवीव को यह साफ संदेश दे रहा है कि राजनीतिक नेतृत्व को खत्म करके ईरान को झुकाया नहीं जा सकता।

14 माह की मासूम का ताबूत इस अंतिम यात्रा की सबसे भावुक और हृदयविदारक तस्वीर खामेनेई के साथ उनकी 14 महीने की पोती का ताबूत है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में खामेनेई के साथ उनके दामाद, सबसे बड़ी बेटी और नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की पत्नी की भी मौत हो गई थी। बच्ची का छोटा ताबूत देशवासियों के आक्रोश को और तीव्र कर रहा है।

इतिहास का सबसे बड़ा लॉजिस्टिकल मिशन ईरानी प्रशासन इस आयोजन को इस्लामिक रिपब्लिक के इतिहास का सबसे बड़ा लॉजिस्टिकल प्रयास बता रहा है। सरकारी कर्मचारियों से लेकर सैनिकों और आम नागरिकों तक, लाखों लोग इसमें जुटे हैं। मीडिया में अब कूटनीतिक चर्चाओं की जगह खामेनेई के जीवन पर आधारित वृत्तचित्रों और गीतों ने ले ली है।

मुहर्रम और शहादत का प्रतीक यह अंतिम संस्कार ऐसे समय में हो रहा है जब शिया इस्लाम में मुहर्रम का महीना चल रहा है, जो शहादत और बलिदान के लिए जाना जाता है। ईरान अब खामेनेई को एक ऐसी शख्सियत के रूप में अमर बनाने की तैयारी में है जो 37 साल तक पश्चिम के विरोध का चेहरा रहे।

बदले की गूंज ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक शोक यात्रा नहीं है। उन्होंने कहा, हमें उठना ही होगा। विश्व को यह पता चलना चाहिए कि ईरान जुल्म के आगे चुप नहीं रहेगा। इमाम के खून का बदला लिए बिना हम नहीं रुकेंगे। दो करोड़ लोगों की भागीदारी के लक्ष्य के साथ, ईरान इस विजय जुलूस के जरिए दुनिया को अपनी मजबूती का अहसास कराना चाहता है।

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