परमाणु बम न होता तो कोई पूछता भी नहीं : पाकिस्तान की बर्बादी पर सिंगापुर के पूर्व राजदूत का कड़ा प्रहार
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सिंगापुर के पूर्व विदेश सचिव और दिग्गज राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तान को लेकर एक ऐसा सच उजागर किया है, जिसने इस्लामाबाद के राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने पाकिस्तान की तुलना विफल होते राष्ट्र से करते हुए उसकी जर्जर व्यवस्था की कलई खोल दी।

सिर्फ परमाणु हथियारों की वजह से बच रही है साख

कौसिकन ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर सबसे तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया पाकिस्तान को लेकर सिर्फ इसलिए चिंतित है क्योंकि उसके पास परमाणु बम हैं। यदि पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश नहीं होता, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसके ढहने या उसके अस्तित्व से कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके अनुसार, दुनिया में पाकिस्तान को जो थोड़ी-बहुत तवज्जो मिलती है, वह उसकी किसी उपलब्धि के कारण नहीं, बल्कि उसके परमाणु हथियारों की वजह से है।

भूगोल को कोसना एक बहाना है

जब पाकिस्तानी पत्रकारों ने देश की दुर्दशा के लिए भारत, अफगानिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देशों की सीमाओं को जिम्मेदार ठहराया, तो कौसिकन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि भूगोल को दोष देना एक खोखला बहाना है। उन्होंने पाकिस्तान की बदहाली का असली कारण देश का आंतरिक कुप्रबंधन, सेना का जरूरत से ज्यादा राजनीतिक दखल और जिहादी गुटों को दी गई बेलगाम छूट को बताया।

मैडम सो रही हैं वाला किस्सा और नेतृत्व की विफलता

पूर्व राजदूत ने पाकिस्तान के नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए एक पुराना किस्सा याद दिलाया। 1991 में जब सिंगापुर एयरलाइंस का विमान अपहृत हुआ था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के स्टाफ ने यह कहकर फोन काट दिया था कि मैडम सो रही हैं, उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता। कौसिकन ने इसे पाकिस्तान के नेतृत्व की उदासीनता और प्रशासनिक ढुलमुलपन का प्रमाण बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान के नेता समय की बर्बादी हैं और वहां की सेना समाधान का हिस्सा नहीं, बल्कि समस्या का मुख्य आधार है।

2026 की भयानक आर्थिक तस्वीर

कौसिकन की ये टिप्पणियां पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक हकीकत के साथ सटीक बैठती हैं। जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में महंगाई दर 12% के खतरनाक स्तर पर है, जबकि आर्थिक विकास दर सिमटकर महज 2.33% रह गई है।

आईएमएफ (IMF) की सख्त शर्तों को पूरा करने के लिए पेश किए गए 61 बिलियन डॉलर के नए बजट का बोझ सीधे तौर पर आम जनता और छोटे व्यापारियों पर डाला गया है। विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा पाकिस्तान से बाहर निकाल रहे हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है। पूर्व राजदूत के अनुसार, पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें चाहे कितनी भी दिखावटी क्यों न हों, वे देश की जनता का पेट नहीं भर सकतीं।

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