हे राम, ऐसी सीनाजोरी! CCTV के सामने मोजों में छिपाते थे नोट, राम मंदिर दान गबन में 80 लाख बरामद
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर हुए महाघोटाले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस और एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि मंदिर के कर्मचारी ही दान की पेटियों से निकले नोटों के बंडलों पर हाथ साफ कर रहे थे। 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज ने इस शातिर गिरोह के काम करने के तरीके को सबके सामने ला दिया है।

सीसीटीवी के सामने ही हाथ की सफाई जांच में सामने आया है कि आरोपी इतने बेखौफ थे कि सीसीटीवी कैमरों के नीचे ही नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों और मोजों में छिपा लेते थे। पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर (PFC) में कार्यरत पांच कर्मचारी मुख्य रूप से इसमें शामिल थे। पुलिस ने इन्हीं वीडियो क्लिप्स के आधार पर कार्रवाई करते हुए अब तक 80 लाख रुपये नकद बरामद कर लिए हैं। चूंकि मंदिर का सीसीटीवी बैकअप केवल 45 दिनों का है, इसलिए पुलिस को आशंका है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था।

ड्राइवर से लेकर भतीजे तक: रसूखदारों का नेक्सस इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव और उसका भतीजा मनीष यादव भी शामिल हैं। पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं। उन्होंने अपनी पहचान और पहुंच का फायदा उठाकर मंदिर के सबसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल दान गणना विभाग में जगह बनाई थी।

न वेरिफिकेशन, न जांच: सिफारिश पर मिली नौकरी यह घोटाला मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करता है। गिरफ्तार आठ में से छह आरोपी वाराणसी की एक प्राइवेट मैनपावर एजेंसी के जरिए रखे गए थे। हैरानी की बात यह है कि इन लोगों का कोई पुख्ता पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करवाया गया था। कैश रूम में काम करने के बावजूद इनकी कोई सख्त चेकिंग नहीं होती थी, जिसका फायदा उठाकर वे बेरोकटोक लाखों रुपये बाहर ले जाते रहे।

व्यवस्था में बड़ा बदलाव: पुजारियों का नया रोस्टर इस शर्मनाक घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। परिसर के सभी 18 मंदिरों में तैनात 35 पुजारियों का ड्यूटी रोस्टर पूरी तरह बदल दिया गया है। गर्भगृह तक के पुजारियों को अब हर 15 दिन में अपनी तैनाती बदलनी होगी। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य एक स्थान पर लंबे समय तक किसी की तैनाती न रखना है ताकि किसी भी तरह के नेक्सस को पनपने से रोका जा सके।

अब बैंक अधिकारियों की बारी जांच का दायरा अब और विस्तृत हो गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक के पीछे बैंक के किन अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत है। आरोपियों से मिली डायरियों और दस्तावेजों से यह भी खंगाला जा रहा है कि गबन किए गए करोड़ों रुपयों से अयोध्या या आसपास कोई संपत्ति तो नहीं खरीदी गई। एजेंसियां अब इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

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