बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। इस मामले ने एनडीए गठबंधन के भीतर के अंतर्विरोधों को सतह पर ला दिया है।
चिराग पासवान का दौरा और अमित शाह से कनेक्शन शुक्रवार (3 जुलाई) को केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने अचानक बिलौटी पहुंचकर भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की और श्रद्धांजलि अर्पित की। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के अगले ही दिन चिराग का वहां पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या चिराग गृह मंत्रालय का कोई विशेष संदेश लेकर वहां पहुंचे थे?
एनडीए में दो फाड़: मांझी बनाम चिराग इस मुद्दे पर एनडीए के भीतर गंभीर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ जहां चिराग पासवान ने एनकाउंटर को सभ्य समाज के लिए अस्वीकार्य बताया और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लगातार इस एनकाउंटर का समर्थन कर रहे हैं। मांझी ने स्पष्ट कर दिया है कि चिराग क्या कर रहे हैं, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है और वे भरत तिवारी को अपराधी मानने के अपने स्टैंड पर कायम हैं।
सम्राट चौधरी की बढ़ी मुश्किलें? भरत तिवारी की मौत के बाद से ही ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश है। एनडीए के भीतर किसी भी प्रमुख मंत्री का वहां न जाना एक बड़ा सियासी अंतर पैदा कर रहा है। चिराग पासवान का वहां जाना सीधे तौर पर बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था और विशेषकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। जिस एसडीपीओ पर आरोप लगे, उन्हें फिर से पोस्टिंग देने के सरकार के फैसले की भी चिराग ने कड़ी आलोचना की है।
जातीय राजनीति की फिर से वापसी भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की फिलहाल न्यायिक जांच चल रही है, जिसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है। लेकिन इस घटना ने बिहार की दबी हुई जातीय राजनीति को पुनर्जीवित कर दिया है। 5 जुलाई को प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को लेकर भी राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। हालांकि, प्रशासन ने फिलहाल कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी है, लेकिन यह साफ है कि यह मामला बिहार की राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
कानून का राज तभी मजबूत होगा, जब कानून के रक्षक स्वयं कानून का सम्मान करेंगे। भारत तिवारी जी की जिस तरह से हत्या हुई, वह किसी भी सभ्य समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
— Lok Janshakti Party (Ramvilas) (@LJP4India) July 3, 2026
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि यदि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारी ही कानून को अपने… pic.twitter.com/GJdkiJgpjy
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