अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम सफर: 4 महीने बाद तेहरान में दिखा शक्ति प्रदर्शन, भारत-पाकिस्तान के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
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तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चार महीने के लंबे इंतजार के बाद शुरू हो गया है। 86 वर्ष की आयु में अमेरिकी-इजरायली हमले में जान गंवाने वाले खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मोसाला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। यह आयोजन न केवल एक शोक सभा है, बल्कि ईरान की गिरती साख और आंतरिक कलह के बीच अपनी सत्ता की ताकत दिखाने का एक बड़ा प्रयास भी है।

भारत और पाकिस्तान के दिग्गज तेहरान में

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए दुनिया भर से राजनयिक और धार्मिक नेता ईरान पहुंचे हैं। भारत की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा, जिसमें पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और अन्य राजनीतिक हस्तियां शामिल रहीं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

अंतिम संस्कार में 4 महीने की देरी क्यों?

इस्लामी परंपरा में शव को जल्द दफनाने का विधान है, लेकिन खामेनेई के मामले में चार महीने की देरी हुई। जानकारों का कहना है कि युद्ध के हालात और सुरक्षा कारणों से शव को लंबे समय तक रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था। शिया कानून के तहत धार्मिक अधिकारियों की विशेष अनुमति से शव को संरक्षित करना संभव हुआ।

जनमत संग्रह के रूप में पेश कर रही सरकार

ईरान सरकार इस अंतिम संस्कार को शासन के प्रति जनता की निष्ठा के रूप में पेश कर रही है। सत्ताधारी इसे एक अनौपचारिक जनमत संग्रह मान रहे हैं, जहां वे 1.5 से 2 करोड़ लोगों को सड़कों पर उतारकर यह संदेश देना चाहते हैं कि इस्लामिक क्रांति अब भी जीवित है। सरकारी स्तर पर लोगों के रहने, खाने और परिवहन की व्यवस्था की गई है ताकि भीड़ का विशाल आंकड़ा जुटाया जा सके।

उत्तराधिकार और अनिश्चितता का दौर

खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है, लेकिन वे हमले में घायल होने और अपनी सुरक्षा के डर से अंतिम संस्कार से दूर हैं। यह उत्तराधिकार ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान आंतरिक दमन, आर्थिक प्रतिबंधों और बाहरी युद्ध के साये में है।

अंतिम यात्रा का रूट

तेहरान में औपचारिकताओं के बाद, पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा। 9 जुलाई को इसे खामेनेई के गृहनगर मशहद में इमाम रजा के मजार के पास दफन किया जाएगा। 1979 की क्रांति के बाद यह ईरान का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार माना जा रहा है, जो आने वाले समय में ईरान की भविष्य की दिशा तय करेगा।

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