पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में इस्लामाबाद के खिलाफ विरोध की लहर तेज हो गई है। रावलाकोट में पिछले 22 दिनों से हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे अब सरकारी उपेक्षा और आर्थिक बदहाली को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
प्रदर्शन की जड़ें: महंगाई और प्रशासनिक नाकामी यह आंदोलन मुख्य रूप से क्षेत्र में व्याप्त खराब प्रशासन, आसमान छूती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार ने जानबूझकर इस क्षेत्र को विकास से दूर रखा है और उनकी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया है। ईदगाह मैदान में जुटे लोगों ने पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इंटरनेट बंदी और आपूर्ति पर संकट आंदोलन के उग्र होने के पीछे एक बड़ा कारण इंटरनेट सेवाओं का ठप होना है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 5 जून से ही इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है, जिससे संचार पूरी तरह से बाधित है। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को भी रोक दिया है, जिससे क्षेत्र में आम जनता के लिए जीवन जीना दूभर हो गया है।
अगर राशन रोका तो बॉर्डर खोल देंगे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सरदार अमन खान जैसे स्थानीय नेताओं ने इस्लामाबाद को कड़ी चेतावनी दी है। अमन खान ने खुले तौर पर कहा है कि यदि पाकिस्तान ने बुनियादी वस्तुओं की सप्लाई में बाधा डाली, तो PoK की सीमाएं खोली जा सकती हैं। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो पाकिस्तान को उन्हें साथ बनाए रखने के लिए मिन्नतें करनी पड़ेंगी।
LoC के करीब धरना और बढ़ती बेचैनी तनाव इस हद तक बढ़ चुका है कि 9 जून से नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट भी एक अलग धरना जारी है। प्रदर्शनों के दौरान कुछ ऐसे बयानों ने भी जोर पकड़ा है जिनमें भारत के साथ संबंधों को सुधारने या संपर्क बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों की किसी स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ये बातें पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता का सबब बनी हुई हैं।
वैश्विक स्तर पर गूंज रही है आवाज केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे PoK के प्रवासी समूहों ने भी मोर्चा खोल दिया है। दुनिया के कई देशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावासों के बाहर प्रवासी नागरिक प्रदर्शन कर रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस क्षेत्र में हो रहे कथित मानवाधिकारों के हनन और राजनीतिक दमन की ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल, इस्लामाबाद की ओर से इन प्रदर्शनों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से 22 दिनों से जन-आक्रोश सड़कों पर दिख रहा है, उसने पाकिस्तान के लिए एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में मोड़ लेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
*RAWALAKOT ROARS:* PoJK Is Not Part of Pakistan Thousands defy Islamabad. Sit-in at LoC since 9 June. Aman Khan: If Pakistan blocks food, PoK s borders could open. Islamabad will beg PoK to stay. @CMShehbaz oppression has consequences.
— 🇮🇳Bhartiyavibhooti🇮🇳 (@Bhartiyavibhoti) June 30, 2026
@UN @POTUS @narendramodi… pic.twitter.com/GhI0XWjwDk
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