ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार: भारत क्यों भेज रहा है बिहार के राज्यपाल को?
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ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। तेहरान में 4 और 5 जुलाई को होने वाले इस भव्य आयोजन में दुनिया भर के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधित्व को लेकर अब स्थिति साफ हो गई है।

कौन करेगा भारत का प्रतिनिधित्व? भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण शोक सभा में शामिल होने के लिए दो वरिष्ठ चेहरों को चुना है। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

पीएम मोदी क्यों नहीं जा रहे? ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष आमंत्रण भेजा गया था। इसके बाद कूटनीतिक गलियारों में पीएम मोदी की यात्रा को लेकर चर्चाएं तेज थीं। हालांकि, पूर्व-निर्धारित अंतरराष्ट्रीय व्यस्तताओं के कारण उनका जाना संभव नहीं है। पीएम मोदी अगले महीने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे।

4 महीने बाद अंतिम संस्कार क्यों? अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को हुई थी, लेकिन उनका अंतिम संस्कार चार महीने बाद किया जा रहा है। इसका कारण उस समय जारी क्षेत्रीय तनाव और युद्ध के हालात थे।

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद स्थिति कुछ सामान्य हुई है, जिसके चलते अब उनके अंतिम संस्कार और सार्वजनिक जुलूस का कार्यक्रम तय किया गया है। तेहरान के बाद कर्बला और नजफ में भी विशेष दुआओं का आयोजन होगा।

महत्वपूर्ण भूमिका में लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन रणनीतिक जानकारों के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन का चयन काफी सोच-समझकर किया गया है। सैन्य पृष्ठभूमि और कूटनीतिक मामलों की गहरी समझ के कारण, मध्य-पूर्व के देशों के साथ संबंधों को संतुलित करने में उनकी उपस्थिति भारत के लिए अहम मानी जा रही है।

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