भीख का कटोरा लेकर नहीं गए थे PM : चीन दौरे पर उठे सवालों पर भड़के बांग्लादेशी विदेश मंत्री
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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के हालिया चीन दौरे को लेकर छिड़े विवाद पर विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कड़ा रुख अपनाया है। आर्थिक मदद मांगने के आरोपों पर उन्होंने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चीन भीख का कटोरा लेकर नहीं गए थे।

क्या है पूरा मामला? प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे के बाद ढाका में यह सवाल उठने लगे कि क्या यह यात्रा चीन से आर्थिक सहायता या कर्ज लेने के लिए थी। विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय दौरों का मकसद केवल पैसा मांगना नहीं होता।

आत्मसम्मान का रखें ध्यान पत्रकारों के सवालों से नाराज विदेश मंत्री ने कहा, कृपया थोड़े आत्मसम्मान का ध्यान रखें। ऐसे सवाल न पूछें, इससे हमें शर्मिंदगी होती है। सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के पास कागज-पेन या भीख का कटोरा लेकर नहीं जाता।

रिश्तों की नई दिशा पर जोर विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, दायरा और गहराई को तय करना था। उन्होंने कहा कि इस दौरे में व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और आपसी सहयोग जैसी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई है।

आर्थिक मदद पर नाराजगी बार-बार आर्थिक मदद के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि यह सोच गलत है कि कोई भी देश केवल पैसे के लिए विदेश यात्रा करता है। उन्होंने समझाया कि ऐसे दौरों का लक्ष्य भविष्य की परियोजनाओं के लिए आत्मविश्वास बढ़ाना और लंबे समय तक चलने वाले साझीदार संबंध विकसित करना होता है।

क्यों चर्चा में है यह टिप्पणी? आमतौर पर भीख का कटोरा जैसी भाषा का इस्तेमाल आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों के लिए किया जाता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री का यह बयान इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान को कूटनीति के केंद्र में रखा है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक कड़ा संदेश देता है।

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