पटना के बांसघाट शवदाह गृह का संचालन अब सद्गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को सौंपे जाने के बाद से विवादों का दौर शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर एक वर्ग इसे श्मशान के व्यावसायीकरण के रूप में देख रहा है। इस बीच, ईशा फाउंडेशन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे डिग्निटी इन डेथ (मृत्यु में गरिमा) की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
सरकार का तर्क है कि अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण समय होता है। ईशा फाउंडेशन के पास तमिलनाडु में 15 वर्षों से 33 शवदाह गृहों के सफल संचालन का अनुभव है, जहाँ उन्होंने 1.25 लाख से अधिक अंतिम संस्कार गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराए हैं। फाउंडेशन का उद्देश्य पारंपरिक संस्कारों को एक ऊर्जा-आधारित और व्यवस्थित दृष्टिकोण देना है, न कि लाभ कमाना।
इसे VIP श्मशान कहे जाने पर फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि यह किसी की विशेष पहुंच के लिए नहीं, बल्कि बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण है। यहाँ इलेक्ट्रिक शवदाह के लिए शुल्क ₹3,500 तय किया गया है, जो नगर निकाय समझौते के तहत न्यूनतम है। फाउंडेशन ने जोर देकर कहा कि पूरी व्यवस्था पारदर्शी है ताकि बिचौलियों को खत्म किया जा सके। गरीब परिवारों के लिए रियायत और मुफ्त सेवाओं पर भी काम किया जा रहा है।
बांसघाट का यह परिसर 4.5 एकड़ में फैला है, जिसमें एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, यहां चिमनियों में उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली लगाई गई है। भविष्य में लकड़ी के उपयोग को पूरी तरह से LPG आधारित प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव है। ईशा फाउंडेशन का स्पष्ट कहना है कि यह भूमि सरकार की संपत्ति है और वे केवल एक सेवा प्रदाता के रूप में इसे संचालित कर रहे हैं।
बिहार सरकार राज्य भर में 40 ऐसे आधुनिक शवदाह गृहों का निर्माण कर रही है, जिनमें से 20 का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। सरकार का दावा है कि यह कदम अंतिम यात्रा को सम्मानजनक बनाने की एक बड़ी कोशिश है, जिसे अनावश्यक रूप से व्यवसाय का रंग दिया जा रहा है।
*पटना में सरकार के पैसे से बने एक शवदाह गृह और श्मशान घाट का संचालन अब जग्गी वासुदेव की संस्था करेगी।
— Ankit Kumar Avasthi (@kaankit) June 24, 2026
यहां अधिक शुल्क देकर VIP सुविधाओं के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
लेखक-पत्रकार @pushymitr की रिपोर्ट pic.twitter.com/ws4zVVhs14
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