8 पद, 25 दावेदार और सिर्फ 1 उम्मीदवार: एमपी वन विभाग की भर्ती में क्या हुआ?
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मध्य प्रदेश वन विभाग की एक हालिया भर्ती प्रक्रिया ने सबको हैरान कर दिया है। विभाग ने बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय (PVTG) समुदायों के लिए फॉरेस्ट गार्ड के 8 पद आरक्षित किए थे। मकसद इन समुदायों को सशक्त बनाना था, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

सिर्फ एक महिला ने दिखाई हिम्मत पात्रता जांच के बाद फिजिकल टेस्ट के लिए कुल 26 अभ्यर्थियों को कॉल लेटर भेजा गया था। हैरानी तब हुई जब परीक्षा के दिन मैदान में सिर्फ एक महिला उम्मीदवार पहुंची। उसने न केवल 15 किलोमीटर की अनिवार्य पैदल चाल पूरी की, बल्कि सभी मानकों पर खरी उतरकर नौकरी भी पक्की कर ली।

7 पद रह गए खाली बाकी 25 अभ्यर्थियों के न पहुंचने से 7 पद खाली रह गए हैं। यह स्थिति जनजातीय क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को बयां करती है। एजुकेशन का लो लेवल, सरकारी नौकरियों की जानकारी का अभाव और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां इस विफलता के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती इस घटना ने सरकारी तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर क्या सूचना उन दूरदराज के क्षेत्रों तक सही समय पर नहीं पहुंची? या फिर इन समुदायों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी मार्गदर्शन और ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही है?

अब आगे क्या? वन विभाग के अधिकारियों और सामाजिक संगठनों में इस पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आरक्षण देना काफी नहीं है। जब तक इन समुदायों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे नहीं पहुंचेगी और उन्हें परीक्षा के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी स्थिति बनी रहेगी।

यह भर्ती एक सबक है कि जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षा और जागरूकता की जमीनी स्तर पर और अधिक मेहनत की जरूरत है।

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