मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने मुख्यमंत्री पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है।
भाजपा का रुख: आरोप बेबुनियाद
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने एकजुट होकर इन आरोपों को तथ्यहीन बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के पास कोई ठोस सबूत नहीं है और यह केवल मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का एक प्रयास है।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान तथ्यों की कसौटी पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह अभियान राजनीतिक विच-हंट (राजनीतिक प्रतिशोध) से ज्यादा कुछ नहीं है, जिसमें शोर तो बहुत है, लेकिन सच्चाई का अभाव है।
क्या है जमीन खरीद का पूरा मामला?
हाल ही में सामने आई एक विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अब तक उनके परिवार ने 137 प्लॉट खरीदे हैं।
कुल 168 एकड़ में फैली इन जमीनों की कीमत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ये जमीनें मुख्यमंत्री की पत्नी, बेटे की पत्नी, भाई और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी जमीनें उन इलाकों में हैं, जहां भविष्य में बड़े हाईवे और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित हैं।
बढ़ती संपत्ति पर भाजपा का मौन
विवाद का एक मुख्य बिंदु यह है कि 2021 से 2023 के बीच, जब मोहन यादव मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री थे, उनके परिवार की लैंड होल्डिंग दोगुनी हो गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री बनने के बाद 2024 से 2025 के बीच यह संपत्ति फिर से दोगुनी हो गई।
विपक्ष इस तेजी से बढ़ती संपत्ति पर सवाल उठा रहा है, लेकिन भाजपा ने इन आंकड़ों और टाइमिंग पर अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। पार्टी फिलहाल इसे केवल राजनीतिक शोर बताकर पल्ला झाड़ती नजर आ रही है।
सियासी बवंडर क्यों?
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री को घेरा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स की जानकारी पहले से होने के कारण इन जमीनों को खरीदा गया, जिससे भारी मुनाफा कमाने की संभावना है। फिलहाल, इस मुद्दे ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के आसार हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ विपक्ष और उसके सहयोगी इकोसिस्टम द्वारा चलाया जा रहा अभियान तथ्यों की कसौटी पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
— Amit Malviya (@amitmalviya) June 25, 2026
जिस रिपोर्ट के आधार पर आरोपों का पहाड़ खड़ा किया गया, उसी की बुनियाद खोखली साबित हुई है।
पहला तथ्य — मुख्यमंत्री बनने के बाद… pic.twitter.com/G0NZWDTm0q
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