पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अगले हफ्ते विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। यह भाजपा का प्रमुख चुनावी वादा रहा है।
चुनावी वादे पर अमल भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में सरकार बनने के छह महीने के भीतर UCC लागू करने की घोषणा की थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनावी रैलियों में इस वादे पर जोर दिया था। अब सत्ता में आने के बाद पार्टी इस पर तेजी से काम कर रही है।
क्या है UCC का आधार? समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे निजी मामलों में धर्म पर आधारित कानूनों को खत्म कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है। सरकार का तर्क है कि इससे समाज में समानता आएगी।
चौथा राज्य बनने की ओर अग्रसर यदि यह विधेयक विधानसभा में पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का चौथा भाजपा शासित राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम इस दिशा में ठोस कदम उठा चुके हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में ही इसे प्रभावी ढंग से लागू कर दिया था।
बदली हुई सियासी स्थिति बंगाल की हालिया राजनीति में भाजपा के लिए यह एक बड़ी सफलता है। विधानसभा की 293 सीटों में से पार्टी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की थी, जो बाद में उपचुनाव के बाद 208 हो गई। वहीं, तृणमूल कांग्रेस अब महज 80 सीटों पर सिमट गई है।
स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार अब अपने एजेंडे को तेजी से लागू करने की स्थिति में है। यह कदम न केवल राज्य की सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले समय में बंगाल की सियासी तस्वीर को भी हमेशा के लिए बदलने की क्षमता रखता है।
🚨 UCC MOMENTUM GATHERS PACE
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) June 25, 2026
West Bengal is likely to table a Uniform Civil Code Bill in the Assembly next week 🤯
— Uttarakhand has already implemented it, while Gujarat and Assam have also advanced their UCC roadmap. (By: Payal Mehta) pic.twitter.com/RiAuONfpm3
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