16 साल से कम उम्र के क्रिकेटर्स के लिए क्यों अलग होता है ड्रेसिंग रूम? वैभव सूर्यवंशी के मामले में क्या कहते हैं नियम
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क्रिकेट का खेल 16वीं शताब्दी में शुरू हुआ था, तब से लेकर आज तक इसमें कई क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। खेल की सुविधाओं और प्रोटोकॉल में आए इन बदलावों के बीच एक नियम बेहद चर्चा में है, जो खास तौर पर 16 साल से कम उम्र के क्रिकेटर्स पर लागू होता है। भारत के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के टीम इंडिया में शामिल होने के बाद यह नियम फिर से सुर्खियों में है।

वैभव सूर्यवंशी और चाइल्ड सेफगार्डिंग पॉलिसी

15 साल के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भारतीय टीम के साथ आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर हैं। वे भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, चूंकि वैभव 16 साल से कम उम्र के हैं, इसलिए उन पर ICC और ECB की चाइल्ड सेफगार्डिंग (Child Safeguarding) पॉलिसी लागू होती है। इस वजह से वे अनुभवी खिलाड़ियों जैसे रोहित शर्मा या विराट कोहली के साथ एक ही ड्रेसिंग रूम का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

क्या है ड्रेसिंग रूम का नियम?

चाइल्ड सेफगार्डिंग नियम स्पष्ट करता है कि 16 वर्ष या उससे कम उम्र के किसी भी खिलाड़ी को सीनियर टीम के सदस्यों के साथ साझा ड्रेसिंग रूम का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसका मतलब यह है कि आयरलैंड और इंग्लैंड के सभी वेन्यू पर वैभव के लिए जर्सी बदलने के लिए एक अलग और सुरक्षित चेंजिंग रूम की व्यवस्था की जाएगी।

टीम मीटिंग में साथ, ड्रेसिंग रूम में अलग

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह प्रतिबंध केवल जर्सी बदलने या निजी कामों के समय ही लागू होता है। मैच के दौरान टीम मीटिंग, रणनीति बनाने या डग-आउट में बैठकर मैच देखने के समय वैभव पूरी तरह से अपनी टीम के साथ रह सकते हैं। इस दौरान मुख्य ड्रेसिंग रूम में उनकी मौजूदगी पर कोई पाबंदी नहीं है।

नाबालिग खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा क्यों जरूरी है?

16 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए यह अलग व्यवस्था तीन मुख्य आधारों पर बनाई गई है:

गार्जियन साथ रहने की सुविधा

नियम यह भी सुनिश्चित करते हैं कि वैभव जैसे युवा प्रतिभावान खिलाड़ी अकेले न रहें। इस उम्र के खिलाड़ियों के साथ उनका क्रिकेट बोर्ड उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक को पूरे टूर पर साथ रहने की अनुमति देता है, ताकि वे खिलाड़ी की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

क्रिकेट की वैश्विक संस्थाएं, ICC और विभिन्न राष्ट्रीय बोर्डों के लिए 18 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यह नियम सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर की अकादमियों और क्लबों में भी युवा प्रतिभाओं की सुरक्षा के लिए सख्ती से पालन किया जाता है।

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