स्टेज पर हुई डिलीवरी और पत्थर से काटी नाड़: श्रद्धा कपूर की ईठा में दिखेगी तमाशा क्वीन विठाबाई की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
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स्त्री 2 की अपार सफलता के बाद श्रद्धा कपूर अपनी आगामी फिल्म ईठा (Eetha) के साथ बॉक्स ऑफिस पर एक बार फिर धमाका करने को तैयार हैं। मैडॉक फिल्म्स और निर्देशक लक्ष्मण उतेकर की इस फिल्म का टीजर सामने आते ही चर्चा का विषय बन गया है। यह फिल्म महज एक काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की जाबांज लोक कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर के संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित है।

कौन थीं विठाबाई नारायणगांवकर? विठाबाई का जन्म 1935 में सोलापुर के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। बचपन से ही तमाशा मंडली से जुड़ीं विठाबाई ने 10 साल की उम्र में मंच पर कदम रखा। अपनी सुरीली आवाज और लाजवाब अभिनय के कारण उन्हें तमाशा सम्राज्ञी (तमाशा की रानी) के खिताब से नवाजा गया।

निजी जीवन का काला अध्याय हंसमुख विठाबाई का निजी जीवन बेहद त्रासद रहा। 15 साल की उम्र में यौन शोषण का शिकार होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। वैवाहिक जीवन में भी उन्हें घरेलू हिंसा और अपने पति द्वारा आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ा। इन तमाम दुखों के बाद भी मंच पर उनका प्रदर्शन कभी फीका नहीं पड़ा।

वह खौफनाक और अद्भुत वाकया फिल्म के टीजर में विठाबाई की जिंदगी का सबसे हैरान कर देने वाला सच दिखाया गया है। एक बार 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद वे स्टेज पर परफॉर्म कर रही थीं। डांस के दौरान ही उन्हें लेबर पेन शुरू हुआ। वे तुरंत बैकस्टेज गईं, बच्चे को जन्म दिया और एक पत्थर से बच्चे की नाड़ (अम्बिलिकल कॉर्ड) काटकर वापस स्टेज पर परफॉर्म करने लौट आईं। यह घटना उनके काम के प्रति अटूट समर्पण और जीवटता का प्रमाण है।

राज कपूर का ऑफर ठुकराया विठाबाई की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शोमैन राज कपूर ने उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका दिया था। लेकिन विठाबाई ने इसे ठुकरा दिया। उनका मानना था कि फिल्मों में जाने से उनकी तमाशा मंडली बंद हो जाएगी और उन पर आश्रित कई गरीब परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। उन्होंने शोहरत से ऊपर अपनी कला और अपने कलाकारों के भविष्य को रखा।

देशभक्ति और अंतिम दिन विठाबाई को 1957 और 1990 में राष्ट्रपति सम्मान मिला। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उन्होंने सीमा पर जाकर सैनिकों का हौसला बढ़ाया। हालांकि, जीवन के अंतिम पड़ाव में वे घोर गरीबी में रहीं। 2002 में लकवे के कारण उनका निधन हुआ, तब हालात इतने खराब थे कि उनके इलाज के लिए चंदा मांगना पड़ा था।

आज सरकार उनकी याद में विठाबाई नारायणगांवकर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देती है। श्रद्धा कपूर का यह किरदार भारतीय सिनेमा में एक नई मिसाल बनने की ओर अग्रसर है।

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