एनसीपी विधायक सना मलिक का ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर विवादित बयान, सियासी गलियारों में मचा तूफान
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महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी विधायक सना मलिक के एक बयान ने राज्य सहित पूरे देश की राजनीति में खलबली मचा दी है। सना मलिक ने ट्रिपल तलाक का समर्थन करते हुए भारत में कुरान आधारित कानूनों को लागू करने की वकालत की है। उनके इस रुख पर राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

क्या कहना है सना मलिक का? विधानसभा में चर्चा के दौरान सना मलिक ने कहा कि इस्लाम में जो कुरान कहता है, उसे ही वे फॉलो करती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कुरान में किसी बात का उल्लेख है और उसे लेकर पाकिस्तान में कोई नियम है, तो भारत को भी वैसे ही नियम लागू करने चाहिए।

शायना एनसी का पलटवार: महिलाओं का अपमान शिवसेना नेता शायना एनसी ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पीएम मोदी ने तीन तलाक खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा दी है, वहीं दूसरी तरफ सना मलिक बहुविवाह जैसे पुराने और पिछड़े मुद्दों का समर्थन कर रही हैं।

शायना ने सवाल उठाया कि जब महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की बात हो, तो सरकार दखल क्यों न दे? उन्होंने कहा कि विवाह और तलाक जैसे मामलों में समानता जरूरी है और ऐसे सुधारों का विरोध करना केवल वोट-बैंक की राजनीति है।

देश संविधान से चलता है, कुरान से नहीं बीजेपी विधायक मनीषा चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत कुरान से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है। उन्होंने याद दिलाया कि हमारी न्याय व्यवस्था पूरी तरह से संवैधानिक ढांचे पर आधारित है।

नीतेश राणे की दो टूक: शरिया चाहिए तो पाकिस्तान जाएं मंत्री नीतेश राणे ने इस मुद्दे पर और आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जो लोग यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का विरोध कर रहे हैं, वे असल में शरिया कानून की मांग कर रहे हैं। राणे ने चेतावनी दी कि भारत में इसके लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, संविधान के आर्टिकल 44 में UCC का स्पष्ट जिक्र है, उसे मानना ही होगा। अगर शरिया कानून ही चाहिए, तो हम आपको पाकिस्तान का टिकट थमा देंगे।

विवाद का केंद्र: धर्म बनाम संविधान सना मलिक के इस बयान ने एक बार फिर भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ और समान नागरिक संहिता (UCC) की बहस को जिंदा कर दिया है। जहां एक पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों और देश की संवैधानिक अखंडता के लिए खतरा मान रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर एनसीपी का आधिकारिक रुख क्या रहता है।

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