ब्रह्मोस की दहाड़ और आकाशतीर का कवच : UAE के साथ रक्षा सौदे से बदल रही दुनिया की जियो-पॉलिटिक्स
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नई दिल्ली। वैश्विक तनाव के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता होने जा रहा है। इस डील के तहत भारत UAE को अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर (Akashteer) बेचेगा। यह सौदा न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि खाड़ी देशों में भी हलचल तेज कर दी है।

ब्रह्मोस: पाकिस्तान के बेस को मलबे में बदलने वाली ताकत

ब्रह्मोस मिसाइल ने अपनी अचूक मारक क्षमता का लोहा तब मनवाया था, जब उसने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को तबाह कर दिया था। भारतीय Su-30MKI फाइटर जेट्स से दागी गई इन मिसाइलों ने दुश्मन के रडार को चकमा देते हुए जमीन से महज 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरी और कमांड सेंटर को नेस्तनाबूद कर दिया। इसकी Mach 2.8 से 3.0 की रफ्तार और सटीक निशाने लगाने की खूबी इसे दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में खड़ा करती है।

क्यों टॉमहॉक पर भारी पड़ रहा है ब्रह्मोस?

पश्चिमी देशों की सबसोनिक मिसाइल टॉमहॉक की तुलना में ब्रह्मोस तीन गुना तेज है और नौ गुना ज्यादा काइनेटिक एनर्जी पैदा करती है। हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एक टॉमहॉक की कीमत करीब 36 करोड़ रुपये है, वहीं ब्रह्मोस मात्र 25 से 35 करोड़ रुपये में उपलब्ध है। कम कीमत और बेजोड़ मारक क्षमता के कारण अब फिलीपींस, वियतनाम और अब UAE जैसे देश इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।

आकाशतीर : एयर डिफेंस का स्मार्ट दिमाग

ब्रह्मोस के साथ भारत UAE को अपना आकाशतीर सिस्टम भी देगा। यह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित एक एडवांस्ड एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम है। यह युद्ध के मैदान में दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को रडार के जरिए पहचान कर उन्हें तुरंत मार गिराने का स्मार्ट दिमाग है। यह UAE के मौजूदा अमेरिकी डिफेंस सिस्टम (THAAD और पैट्रियट) के साथ तालमेल बिठाकर एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करेगा।

सुरक्षा क्यों है UAE की मजबूरी?

पिछले कुछ समय में मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। फरवरी से जून 2026 के बीच UAE को 2,800 से ज्यादा हमलों का सामना करना पड़ा है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का तीन दिनों तक बंद होना UAE के लिए बड़ा आर्थिक झटका था, जिससे उसे हर मिनट करीब 10 लाख डॉलर का नुकसान हुआ। अपनी महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए UAE के पास अब भारतीय हथियारों के रूप में एक भरोसेमंद विकल्प है।

रक्षा निर्यातक बना नया भारत

यह समझौता भारत की उभरती हुई सैन्य ताकत का प्रतीक है। वित्त वर्ष 2014-15 में जो रक्षा निर्यात महज 686 करोड़ रुपये था, वह 2025-26 तक 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। आज भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों की सुरक्षा का आधार बन रहे हैं। कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा भारत, अब दुनिया का बड़ा डिफेंस सप्लायर बनकर उभर आया है।

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