तमिलनाडु के जंगलों में एक बड़ा बदलाव आया है। कभी जहां केवल कांटेदार झाड़-झंखार दिखाई देते थे, वहां अब फिर से प्रकृति की मधुर आवाजें सुनाई देने लगी हैं। राज्य वन विभाग द्वारा शुरू किए गए पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्जीवन (Ecosystem Restoration) अभियान ने 40 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगलों को एक नई जिंदगी दी है।
क्या थी समस्या? इन जंगलों के एक बड़े हिस्से पर लैंटाना जैसी आक्रामक वनस्पतियों ने कब्जा कर लिया था। ये पौधे स्थानीय वनस्पतियों को पनपने नहीं देते थे, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास खत्म हो रहे थे। इन पौधों के कारण जंगल अपनी जैव विविधता खोते जा रहे थे।
कैसे हुआ बदलाव? वन विभाग ने युद्धस्तर पर अभियान चलाकर करीब 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र से इन खरपतवारों को हटाया। इसके बाद वहां स्थानीय पौधों को विकसित करने का मौका दिया गया, जिससे प्राकृतिक तंत्र अपने आप बहाल होने लगा।
लौट आई वन्यजीवों की दुनिया इस प्रयास का परिणाम अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। जंगलों में हाथी, गौर (भारतीय बाइसन) और हिरण जैसे बड़े स्तनधारी जीवों की वापसी हुई है। इसके अलावा, जमीन पर घोंसला बनाने वाले पक्षियों की संख्या में भी इजाफा देखा गया है। ये वन्यजीव अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और अपने पुराने घरों में वापस लौट रहे हैं।
कचरे से बनी ऊर्जा इस पहल की सबसे खास बात वेस्ट टू वेल्थ मॉडल है। हटाए गए आक्रामक पौधों के बायोमास को फेंकने के बजाय उसे बायो-ब्रिकेट्स में बदला गया। विभाग ने करीब 120 मीट्रिक टन ब्रिकेट्स स्थानीय चाय फैक्ट्रियों को भेजे हैं, जिससे न केवल जंगलों का संरक्षण हुआ, बल्कि सतत कार्बन प्रबंधन को भी बढ़ावा मिला है।
प्रकृति को मौका देने का परिणाम तमिलनाडु सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) सुप्रिया साहू ने इस सफलता का श्रेय वन विभाग की पूरी टीम को दिया है। उन्होंने कहा, यह अभियान साबित करता है कि यदि हम प्रकृति को थोड़ा सा मौका दें, तो वह खुद को बहुत तेजी से पुनर्स्थापित कर लेती है।
यह पहल भारत के लिए एक मॉडल बन सकती है, जो जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से लड़ने की दिशा में भी एक कदम है।
Elephants, gaurs, deer and countless other species are returning to areas once overrun by invasive plants as the TN Forest Department, GOTN continues one of India’s largest ecosystem restoration efforts. More than 40,000 hectares of Forests have been restored, including nearly… pic.twitter.com/uz9mIRyqab
— Supriya Sahu IAS (@supriyasahuias) June 23, 2026
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