महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के मराठी उच्चारण पर मचा विवाद बुधवार को थम गया। शोक प्रस्ताव पढ़ते समय शब्दों के गलत उच्चारण को लेकर हुई आलोचनाओं के बाद नार्वेकर ने सदन में खेद व्यक्त किया।
क्या था विवाद? सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल नार्वेकर महान गायिका आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर समेत कई हस्तियों के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ रहे थे। इस दौरान मराठी शब्दों के गलत उच्चारण और नामों में हेरफेर को लेकर विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया पर उनकी कड़ी आलोचना हुई।
क्या बोले विधानसभा अध्यक्ष? बुधवार को सदन में अपना पक्ष रखते हुए नार्वेकर ने कहा, मेरे पास मौजूद शोक प्रस्ताव की मुद्रित प्रति (प्रिंट) बहुत छोटे फॉन्ट में थी और अस्पष्ट थी। तकनीकी त्रुटियों के कारण पढ़ने में गलती हुई। मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें मराठी भाषा पर गर्व है और वह पहले भी सदन में मराठी में कई भाषण दे चुके हैं। अध्यक्ष ने सदस्यों से अपील की कि इस मानवीय भूल को कोई और रंग न दिया जाए।
राज ठाकरे का तीखा प्रहार इस मामले पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने नार्वेकर पर मराठी भाषा का अपमान करने का आरोप लगाया। ठाकरे ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि अध्यक्ष ने दीनानाथ मंगेशकर का नाम दीनदयाल मंगेशकर पढ़ दिया। उन्होंने तंज कसा कि यदि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वाहिली या हिब्रू भाषा में भी पढ़ा होता, तो कोई अंतर नहीं पड़ता।
विपक्षी दलों की नाराजगी विधानसभा में शोक प्रस्ताव के दौरान हुई 30 से अधिक गलतियों को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए थे। सामाना ऑनलाइन ने भी इस घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए नार्वेकर की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, अब माफी मांगने के बाद अध्यक्ष ने इस विवाद को विराम देने का प्रयास किया है।
धानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर यांनी मंगळवारी सभागृहात मराठी भाषेची लक्तरे काढली. आशा भोसले यांच्या निधनाचा पावणेपाच मिनिटांचा शोकप्रस्ताव वाचून दाखवताना नार्वेकर यांनी 30 पेक्षा जास्त गंभीर चुका केल्या. बुधवारी कामकाज सुरू होण्यापूर्वी त्यांनी या प्रकरणी दिलगिरी व्यक्त केली pic.twitter.com/H23tNuCs9l
— Saamana Online (@SaamanaOnline) June 24, 2026
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