जदिया (सुपौल): बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी दूर है, लेकिन सुपौल जिले के जदिया समेत पूरे कोसी क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी अभी से तेज हो गई है। इसका मुख्य कारण है संभावित रोस्टर (आरक्षण सूची) को लेकर चल रही चर्चाएं। गांवों की चौपाल और सोशल मीडिया पर कयासों का बाजार गर्म है।
दिग्गजों के लिए करो या मरो की स्थिति पंचायत चुनाव में मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद के पदों पर आरक्षण का सीधा असर पड़ता है। यदि रोस्टर बदला, तो लंबे समय से अपनी जड़ें जमाए बैठे कई दिग्गज जनप्रतिनिधियों का रास्ता बंद हो सकता है। यह स्थिति पुराने खिलाड़ियों के लिए किसी झटके से कम नहीं होगी।
नए चेहरों के लिए सुनहरा अवसर रोस्टर परिवर्तन की संभावनाओं ने नए और युवा दावेदारों में उम्मीद की किरण जगा दी है। यदि कोई सीट आरक्षित वर्ग (महिला, एससी, एसटी या ओबीसी) के लिए आरक्षित होती है, तो वहां नए चेहरों को अपनी किस्मत आजमाने का सीधा मौका मिलेगा। यही वजह है कि युवाओं में अभी से भारी उत्साह देखा जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चुनावी जंग चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना भले ही जारी न हुई हो, लेकिन सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम) पर संभावित रोस्टर की अनधिकृत सूचियां वायरल हो रही हैं। हालांकि, इन सूचियों की कोई प्रशासनिक पुष्टि नहीं है, फिर भी प्रत्याशी इन्हीं आंकड़ों को आधार मानकर अपने वोट बैंक का गुणा-भाग बिठाने में जुटे हैं।
जनसंपर्क में जुटे दावेदार संभावित चुनाव को देखते हुए वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वे अपने कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों, जैसे सात निश्चय और नली-गली योजनाओं का हिसाब लोगों के बीच रख रहे हैं। वहीं, नए दावेदार सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं ताकि जनता के बीच अपनी पैठ बनाई जा सके।
विश्लेषकों की नजर स्थानीय राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव में रोस्टर केवल आरक्षण नहीं, बल्कि पूरी चुनावी दिशा तय करता है। एक छोटा सा फेरबदल वर्षों की मेहनत पर पानी फेर सकता है, तो किसी अनजान चेहरे को सीधे सत्ता के गलियारे तक पहुंचा सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें जिला प्रशासन की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक आरक्षण सूची पर टिकी हैं।
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— Prabhat Khabar (@prabhatkhabar) June 22, 2026
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