क्या ऑपरेशन टाइगर पर लग गया ब्रेक? उद्धव ठाकरे के संपर्क में आए बागी सांसद निंबालकर
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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर चल रही उठापटक एक नए और अहम मोड़ पर पहुँच गई है। पार्टी के बागी लोकसभा सांसदों में शुमार ओमप्रकाश राजे निंबालकर के ताजा रुख ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कथित ऑपरेशन टाइगर की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निंबालकर की उद्धव से हुई बात शनिवार देर रात ओमप्रकाश निंबालकर ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत की है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने ठाकरे को भरोसा दिलाया है कि वह पार्टी के साथ हैं और उन्होंने अभी तक कोई अलग फैसला नहीं लिया है। निंबालकर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने न कभी उद्धव या आदित्य ठाकरे के खिलाफ कुछ कहा है और न ही भविष्य में कहेंगे। वे आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए सोमवार को मातोश्री भी पहुँच रहे हैं।

वोटरों से राय मशविरा की रणनीति इससे पहले रविवार को पुणे से अपने संसदीय क्षेत्र धाराशिव रवाना होते समय निंबालकर ने कहा था कि वह पार्टी फंड की कमी जैसी समस्याओं को लेकर अपने वोटरों और कार्यकर्ताओं से बात करेंगे। उन्होंने साफ किया कि वे जो भी राजनीतिक फैसला लेंगे, वह जनता की राय के अनुरूप होगा। उनका यह जनता से चर्चा वाला दांव राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

संजय राउत का बड़ा दावा उधर, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि पार्टी के दो बागी सांसद लगातार उनके संपर्क में हैं। राउत का कहना है कि ये सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनता के भारी आक्रोश से डरे हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि बागी सांसद अपनी गलती मानते हैं, तो उनसे बातचीत का रास्ता खुला है।

क्या है ऑपरेशन टाइगर का गणित? पार्टी की संसदीय दल की बैठक में 9 में से 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलों को हवा दी थी। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागियों को कम से कम 6 सांसदों का समर्थन चाहिए। पार्टी ने इन छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसका फिलहाल किसी ने जवाब नहीं दिया है।

उद्धव गुट का सख्त और नरम रुख जहाँ एक तरफ आदित्य ठाकरे ने बागियों के लिए घर वापसी के दरवाजे खुले रखने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में भी है। सूत्रों की मानें तो व्हिप का उल्लंघन करने के आरोप में लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की जा सकती है।

अब सबकी निगाहें सोमवार को निंबालकर की मातोश्री मुलाकात और उनके अगले कदम पर टिकी हैं, जो स्पष्ट करेगा कि क्या यह बगावत थम गई है या शिवसेना (यूबीटी) में संकट अभी बरकरार है।

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