इस्लामाबाद: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता ने पाकिस्तान की कूटनीतिक उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि यह वार्ता उसके यहां होगी, लेकिन दोनों देशों ने उसे दरकिनार कर स्विट्जरलैंड को चुना है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तानी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
भिखारी मध्यस्थ नहीं हो सकते पाकिस्तान के तथाकथित एक्सपर्ट और सरकार समर्थक माने जाने वाले नजम सेठी का दर्द इस अपमान के बाद छलक उठा है। उन्होंने स्वीकार किया है कि ईरान ने पाकिस्तान को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा जोरों पर है कि भिखारी मध्यस्थ (mediator) नहीं हो सकते।
पैसों के लिए कतर को तरजीह नजम सेठी ने एक साक्षात्कार में साफ कहा कि ईरान अब पाकिस्तान के बजाय कतर को अधिक महत्व दे रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण आर्थिक है। ईरान को उम्मीद है कि 300 अरब डॉलर की फंडिंग और रुकी हुई 6 अरब डॉलर की संपत्ति कतर के जरिए ही मिल सकती है। कतर की आर्थिक ताकत के सामने पाकिस्तान की अहमियत ईरान की नजर में शून्य हो गई है।
बिना बुलाए मेहमान बने पीएम और आर्मी चीफ अपनी साख बचाने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने स्विट्जरलैंड का रुख किया है। जानकारों का मानना है कि वहां उनकी मौजूदगी का मकसद केवल दुनिया को यह दिखाना है कि पाकिस्तान अभी भी प्रासंगिक है। मोहसिन नकवी को भी इसी इमेज बिल्डिंग के लिए वहां भेजा गया है ताकि यह साबित किया जा सके कि पाकिस्तान भी वार्ता में शामिल है।
ईरान का रुख अभी भी साफ नहीं पाकिस्तान की इस बेचैनी के बीच ईरान का रवैया भी संदेहास्पद बना हुआ है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रतिनिधि होज्जतोलेस्लाम अब्दुल्ला हाजी सादेघी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत करना उनका मुख्य विकल्प नहीं है। ईरान का यह रुख बताता है कि स्विट्जरलैंड में हो रही यह वार्ता किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी, इस पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।
Beggars can t be mediators.
— Pakistan Untold (@pakistan_untold) June 21, 2026
Moment of realization after months of lies, deceit, optics & boasting.pic.twitter.com/2ToBdXVGsu
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