मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक पहल शुरू हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच हो रही यह बातचीत क्षेत्र में शांति बहाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शांति वार्ता में कौन-कौन शामिल? इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ वरिष्ठ दूत स्टीव विटकॉफ बर्गेनस्टॉक पहुंच चुके हैं। ईरान ने अपने शीर्ष राजनयिक और सुरक्षा अधिकारियों को भेजा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर भी मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कतर भी सक्रिय रूप से शामिल है।
वेंस का मुख्य एजेंडा: न्यूक्लियर और लेबनान स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकताएं तय हैं। उन्होंने कहा, हम परमाणु मुद्दे और लेबनान सीजफायर समझौते को एक बड़े शांति समझौते में बदलने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वेंस के अनुसार, ये दो ऐसे बड़े मुद्दे हैं जो पूरे रीजन की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होंगे।
लेबनान में हिंसा और होर्मुज की चुनौती हालांकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच 60-दिन के संघर्ष विराम का फ्रेमवर्क तैयार हो चुका है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेबनान में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी झड़पें और एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप शांति प्रयासों के सामने सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी तनाव भी चिंता का विषय है। ईरान का दावा है कि लेबनान में इजराइली कार्रवाई के जवाब में उन्होंने समुद्री रास्ता बंद कर दिया है, जबकि अमेरिकी सेना का कहना है कि व्यावसायिक जहाज अभी भी वहां से गुजर रहे हैं।
ईरान की कड़ी शर्तें ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह लेबनान में इजराइल के रवैये को बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाकेई ने कहा कि लेबनान में जायोनी शासन के वादे तोड़ने का मुद्दा बातचीत का मुख्य केंद्र होगा। साथ ही, ईरान अपने प्रतिबंधित एसेट्स को मुक्त कराने और तेल बिक्री के लिए जरूरी लाइसेंस की मांग पर भी जोर दे रहा है।
आगे का रास्ता स्विट्जरलैंड वार्ता एक ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रही है जहां एक छोटी सी चूक मिडिल ईस्ट को फिर से युद्ध की आग में धकेल सकती है। इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को लागू करने के लिए हो रही यह हाई-लेवल मीटिंग, वाशिंगटन और तेहरान के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की आखिरी बड़ी कोशिश मानी जा रही है। क्या यह वार्ता शांति का नया रास्ता खोलेगी या तनाव और बढ़ेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
#WATCH | Buergenstock, Switzerland: US, Iranian, Pakistani leaders arrive for talks at Swiss resort
— ANI (@ANI) June 21, 2026
The video shows-the motorcade carrying US Vice President JD Vance arriving at the Buergenstock resort, Iran s Foreign Minister Abbas Araghchi meeting with Swiss Foreign Minister… pic.twitter.com/FsZv3KyB5q
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