पिता की छोटी दुकान, दियारा का संघर्ष: मेहनत के दम पर सौरभ कुमार बने ग्रामीण विकास अधिकारी
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कटिहार: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और लक्ष्य के प्रति सच्ची निष्ठा हो, तो अभाव और पिछड़े इलाके की बंदिशें कभी आड़े नहीं आतीं। इसे सच साबित कर दिखाया है कटिहार जिले के बरारी प्रखंड के मोहनाडीह गांव के रहने वाले सौरभ कुमार अकेला ने। 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में 388वीं रैंक हासिल कर सौरभ ने ग्रामीण विकास अधिकारी (RDO) के पद पर अपनी जगह पक्की की है।

तंगहाली में भी नहीं रुकने दी पढ़ाई

सौरभ का जीवन संघर्षों की एक लंबी दास्तान है। उनके पिता श्रीकांत मिश्र साहिबगंज में एक छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दियारा का इलाका होने के कारण यहां हर साल बाढ़ और कटन की समस्या रहती है। बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बावजूद पिता ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बेटे की किताबों पर खर्च किया, ताकि सौरभ के सपनों को कोई आंच न आए।

लाइब्रेरी ही बनी कोचिंग

सौरभ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वे पटना गए, जहां पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज से स्नातक और पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की। आर्थिक तंगी के कारण सौरभ महंगे कोचिंग संस्थान नहीं जा सके। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी को ही अपना कोचिंग सेंटर बनाया और सेल्फ-स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया।

यह सफलता मेरे गांव के हर गरीब बच्चे के लिए

अपनी सफलता पर बात करते हुए नवनियुक्त आरडीओ सौरभ ने कहा, हमारे क्षेत्र में बुनियादी साधनों का घोर संकट था। पटना विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी और वहां के सीनियर ही मेरे सबसे बड़े मार्गदर्शक रहे। मेरी यह 388वीं रैंक उस हर बच्चे को समर्पित है, जो बेहद कम संसाधनों के बीच भी प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखता है।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है लक्ष्य

सौरभ का मानना है कि चूंकि वे स्वयं एक बाढ़ग्रस्त और पिछड़े इलाके से आते हैं, इसलिए वे समस्याओं को करीब से समझते हैं। उनकी प्राथमिकता प्रशासनिक सेवा में रहकर सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि उनके क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो सके।

पूरे गांव में जश्न का माहौल

सौरभ की इस उपलब्धि से पूरे मोहनाचांदपुर और भवानीपुर इलाके में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर अपनी प्रसन्नता जाहिर की। पूर्व मुखिया ब्रम्हानंद साह सहित इलाके के प्रबुद्ध लोगों ने कहा कि गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं को मात देकर सौरभ ने पूरे जिले का मान बढ़ाया है। यह जीत केवल एक पद की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति की है।

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