पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को सीधे तौर पर युद्ध की धमकी दी है। सिंधु जल संधि और पानी के बंटवारे को लेकर दिए गए उनके इस विवादित बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को हवा दे दी है।
पानी पर छिड़ा कोल्ड वॉर एक इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ ने कहा कि जल सुरक्षा पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान को लगा कि भारत उसकी जल आपूर्ति में बाधा डाल रहा है, तो वह सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। आसिफ ने कहा, जिस पल हमें लगेगा कि हमारी सुरक्षा खतरे में है, हम भारत के खिलाफ जंग करेंगे।
भारत की दो टूक: एक बूंद भी नहीं जाएगी यह बयान भारत के केंद्रीय जल मंत्री सी.आर. पाटिल के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार पाकिस्तान जाने वाला पानी रोकने की योजना पर काम जारी है। पाटिल ने स्पष्ट किया है कि सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है कि भविष्य में पाकिस्तान की ओर एक बूंद पानी भी न बहे।
क्यों बौखलाया है पाकिस्तान? पाकिस्तान का यह आक्रामक रुख उसकी घरेलू बदहाली को दर्शाता है। वर्तमान में पाकिस्तान की एक-तिहाई आबादी पानी की भीषण किल्लत से जूझ रही है। विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान के कृषि क्षेत्र सूखे की मार झेल रहे हैं। सुक्कुर बैराज में पानी का स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर है, जिससे वहां की नहरों में 80% तक पानी की कमी दर्ज की गई है।
निरीक्षण के नाम पर बहानेबाजी आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के तहत भारतीय परियोजनाओं पर लगातार नजर रखी है। उन्होंने कहा कि उनकी टीमों ने अब तक भारत की जल परियोजनाओं के करीब 115 तकनीकी निरीक्षण किए हैं। वे चेनाब नदी पर चल रहे टनल प्रोजेक्ट्स और पावर स्टेशनों पर भारत की गतिविधियों को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बता रहे हैं।
युद्ध की धमकी का आधार क्या है? विशेषज्ञों का मानना है कि आसिफ का यह बयान केवल एक गीदड़भभकी है। पाकिस्तान का अंदरूनी जल संकट पूरी तरह से कुप्रबंधन और बुनियादी ढांचे की कमी से जुड़ा है, लेकिन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सरकार फिर से भारत का डर दिखाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय संधियों के दायरे में रहकर अपने जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग करेगा।
#WATCH | Delhi: On the decision to terminate the Indus Waters Treaty, Union Minister C.R. Patil says, “It still stands; rather, the treaty has been kept in abeyance. And since Prime Minister Modi took this decision, every effort is being made to ensure not a single drop flows… pic.twitter.com/vnEGNpvD0K
— ANI (@ANI) June 9, 2026
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