मानसून हुआ लापता : 40% कम बारिश से देशभर में हाहाकार, आखिर क्या है ये मौसम का खेला ?
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देश में मानसून ने दस्तक तो दी, लेकिन अब यह रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया है। केरल में देरी (4 जून) से पहुंचा मानसून मध्य भारत तक तो ठीक चला, लेकिन अचानक इसकी रफ्तार पर ब्रेक लग गया। आज स्थिति यह है कि देश भर में बारिश का आंकड़ा औसत से 40% कम है, जिसने किसानों से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है।

मानसून की सुस्ती के पीछे सोमाली जेट का खेल

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के इस ब्रेक के पीछे सबसे बड़ा कारण सोमाली जेट (फाइंडलेटर जेट) का कमजोर पड़ना है। हिंद महासागर में उत्पन्न होने वाली यह वायु प्रणाली दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत की ओर खींचने का काम करती है। इसके कमजोर होने और बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों के अभाव ने मानसून को करीब 12 दिनों तक तेलंगाना और महाराष्ट्र में रोक कर रखा। साथ ही, अल-नीनो का साया भी बारिश की कमी का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

40% कम बारिश, 44 डिग्री तक पहुंचा पारा

आंकड़े डराने वाले हैं। 1 जून से 18 जून के बीच देश में औसत 80.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन मात्र 48.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है। मध्य भारत में तो हालात और भी बदतर हैं, जहां औसत से 63% कम बारिश हुई है। भीषण गर्मी का आलम यह है कि उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 44.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, महाराष्ट्र में पानी की किल्लत के चलते मुंबई जैसे शहरों में लोग गर्मी से बचने के लिए खुले समुद्र तटों पर रात बिताने को मजबूर हैं।

खरीफ की बुवाई पर मंडराया संकट

मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर कृषि पर दिखने लगा है। महाराष्ट्र में अब तक खरीफ सीजन की केवल 1 प्रतिशत बुवाई पूरी हो पाई है। किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहें टिकाए बैठे हैं, क्योंकि बारिश न होने से बुवाई का चक्र पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।

कब होगी राहत की बारिश?

आईएमडी (IMD) की ताजा अपडेट के अनुसार, मानसून की रफ्तार अब फिर से बढ़ने की उम्मीद है। 23 जून तक मानसून के छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है। एक चक्रवातीय घेरा मध्य भारत में सक्रिय हो रहा है, जो बादलों को उत्तर भारत की ओर ले जा सकता है।

फिलहाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के लोग अभी भी मानसून की फुहारों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आने वाले 10 दिन कृषि और जल प्रबंधन के नजरिए से बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

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