खीर भवानी मेले से पहले सक्रिय हुए CM उमर अब्दुल्ला, मंदिर में की विशेष पूजा
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार, 18 जून 2026 को गांदरबल ज़िले के प्रसिद्ध खीर भवानी मंदिर का दौरा किया। रागन्या देवी को समर्पित इस पवित्र मंदिर में मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।

यह दौरा आगामी 22 जून को होने वाले वार्षिक खीर भवानी मेले से ठीक पहले हुआ है। यह मेला कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक माना जाता है।

तैयारियों की समीक्षा और सुरक्षा के निर्देश

मुख्यमंत्री ने मेले के सुचारू आयोजन के लिए चल रहे इंतज़ामों का बारीकी से जायज़ा लिया। उन्होंने अधिकारियों से सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं, परिवहन और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की।

उमर अब्दुल्ला ने निर्देश दिए कि तीर्थयात्रियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। स्थानीय प्रशासन और पुजारियों ने मुख्यमंत्री को सभी तैयारियों के प्रति आश्वस्त किया है।

भाईचारे की मिसाल है यह मेला

मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने इसे कश्मीर की पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं और आपसी भाईचारे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कश्मीर के सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की एक अनूठी पहचान है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी दुनिया भर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे और देवी रागन्या का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

मंदिर का आध्यात्मिक और रहस्यमयी महत्व

मध्य कश्मीर के तुलमुल्ला में स्थित खीर भवानी मंदिर देवी दुर्गा के रूप रागन्या देवी को समर्पित है। यह मंदिर एक प्राकृतिक झरने के बीच स्थित है, जो सदियों से कश्मीरी पंडितों की आस्था का केंद्र रहा है।

इस स्थान को खीर भवानी इसलिए कहा जाता है क्योंकि भक्त देवी को प्रसन्न करने के लिए दूध और चावल से बनी खीर अर्पित करते हैं।

जल के रंग में छिपा भविष्य

खीर भवानी मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यहां का पवित्र जल-स्रोत है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस झरने के पानी का रंग समय-समय पर बदलता रहता है।

लोक मान्यता है कि पानी का गहरा रंग बदलना कश्मीर के लिए अशुभ संकेत हो सकता है। सदियों से भक्त इस रंग परिवर्तन को घाटी के भविष्य की परिस्थितियों से जोड़कर देखते आए हैं, जो इस स्थान को और भी अधिक रहस्यमयी बनाता है।

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