कश्मीर हमारा, सिंधु संधि का दौर खत्म : UN में अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को आईना दिखाया
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के झूठ के पुलिंदे को दिन के उजाले में बेनकाब कर दिया है। न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में उन्होंने न केवल भारत की स्थिति स्पष्ट की, बल्कि पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर कड़े प्रहार किए।

आतंक का पनाहगार और पीड़ित होने का ढोंग अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के आतंकवाद पीड़ित वाले दावे को एक बड़ा विरोधाभास बताया। उन्होंने कहा, यह वही देश है जिसके रक्षा मंत्री गर्व से आतंकवादियों को पनाह देने, उन्हें ट्रेनिंग देने और तैनात करने की अपनी नीति का बखान करते हैं। फिर भी पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है। उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास सिर्फ पाकिस्तान ही पैदा कर सकता है।

सिंधु जल संधि पर भारत का रुख सख्त सिंधु जल समझौते (IWT) को लेकर भारत ने अपनी मंशा साफ कर दी है। अनुपमा सिंह ने कहा कि 1960 का यह समझौता अब पुराना पड़ चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस संधि पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। भारत का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद को बढ़ावा दे और दूसरी तरफ सद्भावना की उम्मीद करे, यह अब संभव नहीं है।

जम्मू-कश्मीर: बहस की कोई गुंजाइश नहीं कश्मीर मुद्दे पर भारत ने ओआईसी (OIC) और पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। अनुपमा सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार को उसकी घरेलू विफलताओं को छिपाने की कोशिश करार दिया। साथ ही, ओआईसी के मंच का दुरुपयोग करने के लिए भी पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया।

पीओजेके की बदहाली पर घेरा भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान को उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में चल रही अशांति की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि मुजफ्फराबाद और रावलकोट में जारी विरोध प्रदर्शन और नागरिकों पर हो रहे अत्याचार पाकिस्तान के दमनकारी शासन का नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि अपनी जमीन की बदहाली से ध्यान भटकाने के लिए ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ड्रामे करता है।

कौन हैं अनुपमा सिंह? अनुपमा सिंह भारतीय विदेश सेवा (IFS) की 2014 बैच की अधिकारी हैं। उन्होंने मौलाना आजाद एनआईटी से इंजीनियरिंग और दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई की है। अपनी तेज-तर्रार और सटीक कूटनीति के लिए पहचानी जाने वाली अनुपमा ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा है।

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