ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ सीधे संवाद का समर्थन कर एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। यह संकेत ईरान की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, खामेनेई ने स्पष्ट किया है कि बातचीत का अर्थ अमेरिकी दबाव या उनकी शर्तों के सामने घुटने टेकना नहीं है।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच युद्ध समाप्ति पर हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद आया है।
समझौते पर क्या बोले खामेनेई? खामेनेई ने माना कि उन्होंने इस समझौते को मंजूरी दी है, लेकिन यह उनकी व्यक्तिगत पसंद नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने हताशा में आकर दबाव के सभी हथकंडे अपनाए।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियन द्वारा ईरानी जनता और रेजिस्टेंस फ्रंट के अधिकारों की रक्षा का पक्का भरोसा मिलने के बाद ही उन्होंने इस समझौते को हरी झंडी दी है। अब पूरा देश समझौते की शर्तों के क्रियान्वयन पर नजर रखेगा।
बातचीत पर बदला रुख? अतीत में खामेनेई अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी वार्ता को अनुपयोगी मानते रहे हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने इसे न तो सम्मानजनक बताया था और न ही बुद्धिमानी भरा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब संवाद के लिए समर्थन जताना ईरान की एक सोची-समझी रणनीति है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव ईरान की ओर से अपनी साख बचाते हुए सम्मानजनक निकास की कोशिश है, जिससे इजराइल जैसे प्रतिद्वंद्वियों का क्षेत्रीय प्रभाव सीमित हो सके।
होर्मुज जलमार्ग में लौटी रौनक समझौते का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक अवरोध हटा लिए गए हैं। गुरुवार को होर्मुज जलमार्ग से 1.25 करोड़ बैरल से अधिक तेल का परिवहन हुआ, जो युद्ध शुरू होने के बाद से एक दिन का सर्वाधिक आंकड़ा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह एक बड़ी राहत है।
परमाणु निरीक्षण की ओर कदम खबरों के अनुसार, ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, यह आधिकारिक समझौते का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसे अमेरिका के साथ विश्वास बहाली का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह कूटनीतिक पहल शांति की स्थायी नींव बनेगी या महज एक अस्थायी विराम।
The full text of the message of Imam Sayyid Mojtaba Khamenei, the Leader of the Islamic Revolution, addressing the Iranian nation regarding the Memorandum of Understanding between the presidents of Iran and America, June 18, 2026 pic.twitter.com/9nSD2NfkVe
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) June 18, 2026
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