ममता बनर्जी का प्लान बी तैयार: बागी सांसदों को घेरने के लिए क्या है TMC का गुप्त हथियार?
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन बेहद निर्णायक होने वाला है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आज टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों के भविष्य पर फैसला सुनाएंगे, जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा किया है।

टीएमसी के भीतर मची इस उथल-पुथल ने ममता बनर्जी के लिए संकट जरूर पैदा किया है, लेकिन पार्टी ने अपनी रणनीति पहले ही तैयार कर ली है। ममता बनर्जी की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि वह इतनी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं हैं।

स्पीकर के फैसले के बाद क्या होगा TMC का रुख?

यदि लोकसभा अध्यक्ष बागी सांसदों को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता दे भी देते हैं, तो भी टीएमसी चुप बैठने वाली नहीं है। ममता बनर्जी ने कानूनी, संवैधानिक और राजनीतिक स्तर पर लड़ाई लड़ने के लिए मोर्चाबंदी पूरी कर ली है।

पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि केवल संसद में गुट बना लेने से कोई पार्टी अलग नहीं हो जाती। इसके लिए टीएमसी हर उस विकल्प का उपयोग करेगी जिससे बागी सांसदों की घेराबंदी की जा सके।

दल-बदल कानून: ममता का सबसे बड़ा हथियार

कानून के जानकारों के अनुसार, टीएमसी के तरकश में सबसे धारदार तीर दल-बदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) है। यह कानून ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा ढाल बनकर उभरा है।

नियमों के मुताबिक, किसी भी राजनीतिक दल के विभाजन के लिए केवल संसदीय दल का अलग होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए वास्तविक राजनीतिक पार्टी का मुख्य पार्टी में विलय होना अनिवार्य है। टीएमसी इसी तकनीकी पेच का फायदा उठाते हुए बागी सांसदों को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में है।

दिल्ली में सक्रिय हैं अभिषेक बनर्जी

इस संकट को देखते हुए टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी खुद दिल्ली पहुंच चुके हैं। वे आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे। टीएमसी का स्पष्ट रुख है कि पार्टी की सदस्यता और निष्ठा का उल्लंघन करने वाले सांसदों को कानून के दायरे में सजा मिलनी चाहिए।

यह देखना दिलचस्प होगा कि स्पीकर का फैसला इन बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य को किस दिशा में ले जाता है और ममता बनर्जी का यह प्लान बी कितना कारगर साबित होता है।

(खबर अपडेट की जा रही है)

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