राम मंदिर का चंदा और खर्च: आखिर कहां जाता है भक्तों का पैसा? नृपेंद्र मिश्र ने खोला राज
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अयोध्या राम मंदिर में आने वाले दान और कथित हेराफेरी के मामलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंदिर के आर्थिक प्रबंधन और दान की पारदर्शिता पर खुलकर बात की।

निर्माण और रोजाना के खर्च में अंतर नृपेंद्र मिश्र ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर के पास आने वाला पैसा दो हिस्सों में काम करता है। पहला, वह बड़ा फंड जो शुरुआत में चंदे के रूप में जुटा था (करीब 3200 करोड़ रुपये), जिसे पूरी तरह से मंदिर निर्माण और उसके विस्तार के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसे किसी भी प्रकार के मेंटेनेंस या दैनिक खर्च में इस्तेमाल नहीं किया जाता।

कैसे चलता है रोजाना का कामकाज? दूसरे हिस्से में वह दान आता है जो भक्त रोजाना मंदिर में चढ़ाते हैं। इसी राशि से मंदिर का दिन-प्रतिदिन का खर्च चलाया जाता है। इसमें मंदिर के कर्मचारियों का वेतन, विशेष आयोजन और भक्तों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था शामिल है। ट्रस्ट के अनुसार, रोजाना करीब 2000 लोग मंदिर परिसर में भोजन करते हैं, जिसका खर्च इसी दैनिक दान से निकलता है।

SIT की जांच पर क्या बोले मिश्र? चंदा चोरी और हेराफेरी के आरोपों पर चल रही SIT जांच के बारे में नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि निर्माण समिति से अब तक जांच टीम ने कोई भी ब्योरा नहीं मांगा है। उन्होंने साफ किया कि निर्माण समिति कोई वित्तीय लेनदेन नहीं करती है। समिति में केवल 5 लोग हैं और उनके पास ऐसा कोई संसाधन या अधिकार नहीं है कि वे भुगतान कर सकें। सारा वित्तीय प्रबंधन सीधे ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

दान की राशि और आंकड़ों का गणित हेराफेरी के दावों पर उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़े देना मुश्किल है। पिछले 11 महीनों में करीब 16 करोड़ लोगों ने दर्शन किए हैं और आधिकारिक तौर पर दान का आंकड़ा 83 करोड़ रुपये के आसपास है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति दान मात्र 5 रुपये आता है, जिस पर मिश्र ने भी हैरानी जताई। उन्होंने माना कि यह आंकड़ा कम प्रतीत होता है और वास्तविक दान इससे कहीं अधिक होना चाहिए।

पारदर्शिता पर ट्रस्ट की नजर नृपेंद्र मिश्र का बयान ऐसे समय में आया है जब मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था के साथ-साथ चंदे के सही इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। ट्रस्ट अब आने वाले समय में दान के आंकड़ों और उनके व्यय को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की स्थिति में है।

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