लोकसभा परिसीमन को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हालिया बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नायडू पर कड़ा पलटवार करते हुए उनके तर्क को खारिज कर दिया है।
नायडू का दावा और थरूर का तर्क मुख्यमंत्री नायडू ने एक साक्षात्कार में तर्क दिया था कि परिसीमन से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में कम से कम 50% की वृद्धि होगी। इसके जवाब में थरूर ने कहा कि प्रतिशत में यह वृद्धि समान लग सकती है, लेकिन इसका राजनीतिक असर दक्षिण भारत के राज्यों के लिए नुकसानदेह होगा।
सैलरी फॉर्मूले से समझें गणित थरूर ने सोशल मीडिया पर एक उदाहरण देते हुए लिखा, मान लीजिए आपकी सैलरी 2 लाख है और आपके ड्राइवर की 20 हजार। अगर 50% की बढ़ोतरी होती है, तो आपकी सैलरी 3 लाख और ड्राइवर की 30 हजार होगी। प्रतिशत में भले ही बढ़ोतरी बराबर हो, लेकिन आप पहले की तुलना में और अधिक मजबूत स्थिति में होंगे।
राजनीतिक वजन का बढ़ेगा अंतर थरूर ने सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश और केरल के बीच का वर्तमान अंतर और अधिक नहीं बढ़ जाएगा? उन्होंने कहा कि यदि यूपी की सीटें 80 से बढ़कर 120 और केरल की 20 से 30 होती हैं, तो आनुपातिक अंतर बहुत बड़ा हो जाएगा। यूपी के पास अतिरिक्त 90 सांसदों का बल होगा, जो दक्षिण के राजनीतिक वजूद को कमजोर कर देगा।
दक्षिण के राज्यों की चिंता वाजिब? कांग्रेस सांसद ने नायडू को चेतावनी देते हुए कहा कि वे दक्षिण भारतीय राज्यों के राजनीतिक महत्व को नजरअंदाज न करें। थरूर का मानना है कि सीटों का यह नया गणित उत्तर भारतीय राज्यों को अत्यधिक राजनीतिक ताकत देगा, जबकि दक्षिण के राज्यों की आवाज संसद में और दब जाएगी।
फिलहाल, परिसीमन के इस जटिल गणित ने सत्ता के गलियारों में बहस छेड़ दी है कि क्या विकास और जनसंख्या को आधार बनाकर सीटों का बंटवारा देश के संघीय ढांचे के लिए सही है या नहीं।
Naidu ji, let’s try a thought experiment. Say your salary is 2 lakhs and your driver’s is 20,000. You announce a 50% increase for everybody. Your salary is now 3 lakhs and your driver’s is 30,000. The percentage or proportional increase is the same — but aren’t you much better… pic.twitter.com/VPLAeMuSOl
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 17, 2026
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