अचानक हुआ महाधमाका: तय समय से पहले ट्रंप और पेज़ेशकियन ने किए सीक्रेट साइन!
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मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दशकों की दुश्मनी और युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान ने एक बेहद गुप्त और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर डिजिटल दस्तखत कर दिए हैं। इस समझौते के साथ ही दोनों देशों के बीच चल रही तनातनी खत्म हो गई है और दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री जीवनरेखा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत प्रभाव से खोल दिया गया है।

बंद कमरों की सीक्रेट डील: समय से पहले डिजिटल हस्ताक्षर इस महाडील को लेकर सस्पेंस का स्तर यह था कि आधिकारिक दस्तखत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने थे। लेकिन, डिप्लोमैटिक सूत्रों के मुताबिक, परदे के पीछे अचानक टाइमटेबल बदलने का फैसला लिया गया। होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत सक्रिय करने के मकसद से इसे प्रीपोन किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस में एक डिनर के दौरान इस पर साइन किए, जबकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने डिजिटल माध्यम से तुरंत अपनी मुहर लगा दी।

पाकिस्तान बना पीस-मेकर इस पेचीदा बातचीत को अंजाम तक पहुँचाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। शरीफ़ ने घोषणा की कि उनके माध्यम से हुए इस ऐतिहासिक MoU के तहत ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया है और अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा ली है। यह साफ है कि इस समझौते की स्क्रिप्ट काफी समय से परदे के पीछे लिखी जा रही थी।

परमाणु कार्यक्रम और 14-सूत्रीय समझौता व्हाइट हाउस द्वारा जारी 14-सूत्रीय मेमोरेंडम के मुताबिक, यह सिर्फ एक सीजफायर नहीं, बल्कि ईरान के लिए नए युग की शुरुआत है। समझौते के तहत ईरान अपनी परमाणु सामग्रियों को नष्ट करने पर सहमत हो गया है। बदले में, अमेरिका ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदियों में ढील देगा और ईरानी तेल के निर्यात को मंजूरी देगा, जिससे ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा कर पाएगा।

लेबनान से अमेरिकी सेना की वापसी का बड़ा दांव समझौते का सबसे बड़ा रणनीतिक असर लेबनान पर पड़ेगा। मेमोरेंडम में लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने और हिज़्बुल्लाह समेत सभी मोर्चों पर मिलिट्री ऑपरेशंस रोकने का वादा किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि फाइनल एग्रीमेंट के महज 30 दिनों के भीतर मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी हो जाएगी, जो अमेरिकी विदेश नीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव है।

खेल अभी बाकी: स्विट्जरलैंड में महामुकाबला भले ही डिजिटल समझौते ने शांति की नींव रख दी हो, लेकिन असली सस्पेंस अभी बाकी है। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के हाई-लेवल डेलीगेशन की बैठक होगी। अमेरिकी टीम का नेतृत्व वाइस-प्रेसिडेंट जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरान की ओर से स्पीकर मोहम्मद-बाघेर ग़ालिबफ़ शामिल होंगे। इस बैठक में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर व्यापक बातचीत और भविष्य के ब्लूप्रिंट पर चर्चा की जाएगी। पूरी दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या यह कागजी शांति जमीनी हकीकत बन पाएगी।

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