ट्रंप प्रशासन में बड़ा फेरबदल: ईरान डील का विरोध करने वाले रक्षा मंत्री और CIA चीफ की कुर्सी पर संकट
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वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस समय भारी आंतरिक कलह से गुजर रहा है। ताजा खबरों के अनुसार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ को उनके पदों से हटाया जा सकता है। इन दोनों दिग्गजों पर गाज गिरने की मुख्य वजह इनका ईरान डील का कड़ा विरोध करना बताया जा रहा है।

विरोध की भारी कीमत व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौते को लेकर बेहद गंभीर हैं। हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में हेगसेथ और रैटक्लिफ ने इस डील का पुरजोर विरोध किया था। माना जा रहा है कि इस असहमति की उन्हें निजी कीमत चुकानी पड़ सकती है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब इस बहस का दौर खत्म हो चुका है और विरोध करने वालों को पद से हटाया जा सकता है।

हेगसेथ पर युद्ध की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की मुश्किलें लंबे समय से बढ़ी हुई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कई बार संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के लिए हेगसेथ जिम्मेदार हैं। मार्च 2026 में ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध के पैरोकारों में हेगसेथ सबसे आगे थे। राष्ट्रपति का मानना है कि हेगसेथ के कहने पर ही यह युद्ध शुरू हुआ था और अब असफलताओं की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।

ट्रंप की टीम में बढ़ती दरार ईरान डील को लेकर ट्रंप की कैबिनेट दो स्पष्ट धड़ों में बंट गई है। एक तरफ हेगसेथ, जॉन रैटक्लिफ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो हैं, जो समझौते के खिलाफ हैं। वहीं दूसरी तरफ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनेर समझौते का समर्थन कर रहे हैं।

इजराइल के साथ बिगड़ते रिश्ते इस डील के कारण अमेरिका और इजराइल के संबंधों में भी बड़ी खटास आई है। जेडी वेंस और विटकॉफ की पैरवी के कारण अमेरिका ने ईरान मुद्दे पर इजराइल को अलग-थलग छोड़ दिया है। इसका असर ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के व्यक्तिगत संबंधों पर भी पड़ा है। हाल ही में पेरिस में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजराइल की कार्यप्रणाली की आलोचना की, जिससे मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक नया तनाव पैदा हो गया है।

विपक्ष का दबाव रक्षा मंत्री हेगसेथ के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस में भी माहौल गर्म है। विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश में हैं। हालांकि, पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण इसे अब तक पेश नहीं किया जा सका है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उनके खिलाफ बढ़ रही नाराजगी का असर निश्चित तौर पर उनके भविष्य पर पड़ेगा।

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