कतर की पाबंदी और बारूदी समंदर: कैसे भारतीय जहाज दिशा ने बचाई देश की ऊर्जा सुरक्षा की साख!
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पश्चिम एशिया में पिछले साढ़े तीन महीने से जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के बाद, भारतीय एलएनजी कैरियर दिशा ने दुनिया के सबसे खतरनाक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। यह सफलता भारत की चरमराती ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवनदान साबित हुई है।

ऊर्जा संकट और फोर्स मेज्योर का डर भारत अपनी जरूरत की लगभग 50 फीसदी नेचुरल गैस आयात करता है, जिसका 65 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से आता है। 28 फरवरी को ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के बाद तेहरान ने इस रूट को बंद कर दिया था। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कतर ने फोर्स मेज्योर (अपरिहार्य आपातकाल) की घोषणा कर दी, जिससे भारत में गैस और बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा था।

मिशन दहेज : 62,370 टन ईंधन के साथ वापसी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा प्रबंधित और पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड द्वारा किराए पर लिया गया जहाज दिशा , 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस लेकर स्वदेश लौट रहा है। मंत्रालय के अनुसार, सब कुछ सही रहा तो यह जहाज 18 जून को गुजरात के दहेज टर्मिनल पर लंगर डालेगा। इस शिपमेंट के आने से बंद पड़ी भारतीय फैक्ट्रियों और सप्लाई चेन के फिर से सुचारू होने की उम्मीद है।

खाड़ी में फंसे नाविकों की सुरक्षा को लेकर सख्ती होर्मुज जलडमरूमध्य से अब तक 15 जहाजों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, अभी भी करीब 325 भारतीय नाविक डेंजर जोन में हैं। खाड़ी के अशांत इलाकों में वर्तमान में करीब 18,000 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने 24 घंटे की आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की है। अब तक 3,500 से अधिक नाविकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

सरकार का कड़ा अल्टीमेटम युद्धविराम के बावजूद समंदर में खतरे बरकरार हैं। फिलहाल 13 भारतीय जहाज अभी भी संवेदनशील जोन में मौजूद हैं। इसे देखते हुए शिपिंग महानिदेशालय ने सभी कंपनियों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है कि वे सुरक्षा नियमों का 100% सख्ती से पालन करें। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन हर समुद्री गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं ताकि बाकी जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।

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