कन्फर्म AC टिकट फिर भी ट्रेन से बाहर: पाटलिपुत्र जंक्शन पर यात्रियों के साथ ऐसा क्या हुआ?
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भारतीय रेलवे में आरामदायक सफर के लिए यात्री अपनी जेब ढीली कर AC 2-टियर का कन्फर्म टिकट खरीदते हैं। लेकिन, जब स्टेशन पर पहुँचने के बाद भी आपको ट्रेन में चढ़ने तक न दिया जाए, तो सारा सिस्टम सवालों के घेरे में आ जाता है। बिहार के पाटलिपुत्र जंक्शन से सामने आई एक ऐसी ही घटना ने रेलवे की व्यवस्था की पोल खोल दी है।

क्या हुआ सीमांचल एक्सप्रेस (12488) में?

राहुल कुमार पांडे नामक यात्री ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे अपनी पत्नी और एक साल के छोटे बच्चे के साथ यात्रा करने के लिए समय पर स्टेशन पहुँच गए थे। उनके पास AC 2-टियर का कन्फर्म टिकट था, लेकिन ट्रेन के आते ही उनके होश उड़ गए। कोच A2 के दरवाजे अंदर से बंद थे और प्रवेश द्वारों पर सैकड़ों छात्रों का कब्जा था। भारी भीड़ के चलते वे और उनका परिवार ट्रेन में कदम तक नहीं रख सके।

भीड़ में बिलखता रहा मासूम, तमाशबीन बनी रही सुरक्षा बल

राहुल के लिए यह अनुभव किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। धक्का-मुक्की और बेकाबू भीड़ के बीच उनका एक साल का मासूम बच्चा डर के मारे चीखता-चिल्लाता रहा। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि मौके पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या रेलवे स्टाफ ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे परिवार को अपनी यात्रा मजबूरन रद्द करनी पड़ी।

सोशल मीडिया पर फूटा यात्रियों का गुस्सा

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जनता का आक्रोश फूट पड़ा। हजारों यात्रियों ने अपने कड़वे अनुभव साझा करते हुए पूछा कि क्या परीक्षा या त्योहारों के सीजन में रेल नेटवर्क यात्रियों के लिए बंधक बन जाता है? क्या हजारों रुपये खर्च करके कन्फर्म टिकट लेना केवल एक औपचारिकता रह गई है, जहाँ अपनी ही सीट तक पहुँचने के लिए जान की बाजी लगानी पड़े?

रेलवे प्रशासन हरकत में, क्या मिलेगा इंसाफ?

वीडियो के वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। रेलवे सेवा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दानापुर के डीआरएम (DRM) को फॉरवर्ड कर दिया है। डीआरएम कार्यालय ने भी शिकायत दर्ज कर जांच का आश्वासन दिया है। पीड़ित यात्री ने अब अपनी छूटी हुई यात्रा का पूरा रिफंड और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

यह घटना साफ करती है कि भारतीय रेलवे में भीड़ प्रबंधन की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जिसकी कीमत अंततः एक सामान्य और ईमानदार टिकट धारक को चुकानी पड़ती है।

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