दुनिया के सबसे धनी और विकसित देशों के समूह G7 का शिखर सम्मेलन शुरू हो चुका है। इस समूह में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा शामिल हैं। भारत इसका आधिकारिक सदस्य नहीं है, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। आखिर भारत की वो कौन सी ताकत है, जिसके बिना G7 की चर्चा अधूरी मानी जाती है?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के अनुसार, भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। दिलचस्प बात यह है कि भारत की जीडीपी कई G7 सदस्य देशों, जैसे कनाडा और फ्रांस से भी बड़ी हो चुकी है। वैश्विक मंदी की आहट के बीच भारत की विकास दर इन विकसित देशों के लिए एक बड़ी उम्मीद और निवेश का केंद्र है।
भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की 68% आबादी कामकाजी उम्र की है। विकसित देशों में बढ़ रही बुजुर्गों की आबादी के बीच भारत का युवा और कुशल वर्कफोर्स दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए अपरिहार्य है।
अमेरिका, जापान और यूरोपीय देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतियां मजबूत कर रहे हैं। इस क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक तालमेल के लिए भारत के सहयोग के बिना आगे बढ़ना इन देशों के लिए कठिन है। यही कारण है कि ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश भारत को अपनी इंडो-पैसिफिक नीति के केंद्र में रखते हैं।
भारत ने हमेशा गुटनिरपेक्ष और स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है। पश्चिमी देशों के साथ भारत के मजबूत आर्थिक संबंध हैं और दोनों की लोकतांत्रिक विचारधाराएं मेल खाती हैं। भारत ने कभी किसी दूसरे देश पर एकतरफा पाबंदियों के दबाव में आकर अपनी नीति नहीं बदली, जिसने विश्व मंच पर भारत की स्वतंत्र छवि और विश्वसनीयता को और पुख्ता किया है।
1980 के दशक में G7 देशों की जीडीपी दुनिया की कुल जीडीपी का 70% थी, जो अब सिमटकर 40% रह गई है। हडसन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में G7 का प्रभाव और कम हो सकता है। ऐसे में भारत को साथ लेकर चलना इन देशों की मजबूरी और जरूरत बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की 13वीं बार G7 में उपस्थिति है। विदेश मंत्रालय का मानना है कि शांति, सुरक्षा, विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत की राय अब दुनिया के लिए दिशा-निर्देशक का काम करती है। यही कारण है कि G7 जैसे शक्तिशाली मंचों पर भारत का आमंत्रण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य वैश्विक अनिवार्यता बन गया है।
Évian, here we are! pic.twitter.com/KOjQ5mg86h
— G7 (@G7) June 15, 2026
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