# नीट के लिए Telegram पर ताला! नकल रोकने की कोशिश या करोड़ों यूजर्स की सजा?
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार ने टेलीग्राम (Telegram) पर अस्थायी रूप से रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। परीक्षा के दौरान पेपर लीक और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है।

सरकार का कड़ा रुख क्यों? बीते कुछ समय में टेलीग्राम के जरिए NEET का पेपर लीक करने और फर्जी प्रश्नपत्र बेचने के कई दावे सामने आए थे। सरकार का मानना है कि परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें और पेपर बेचने वाले गिरोह छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। इन गतिविधियों को रोकने और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार ने इसे जरूरी कदम बताया है।

सरकार को फैसले से क्या उम्मीदें हैं? इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह निर्देश दिया है। सरकार का तर्क है कि:

आम यूजर्स की परेशानी और सवाल क्या पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना सही समाधान है? सोशल मीडिया पर यूजर्स इस आदेश पर सवाल उठा रहे हैं। कई छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स का कहना है कि टेलीग्राम सिर्फ गलत गतिविधियों का अड्डा नहीं है। लाखों छात्र पढ़ाई के नोट्स, ऑनलाइन क्लासेस और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इसका उपयोग करते हैं। अचानक हुई इस बंदी का प्रतिकूल असर उन लोगों पर भी पड़ेगा, जिनका अपराध से कोई नाता नहीं है।

क्या अपराधी रुक जाएंगे? साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक ऐप को ब्लॉक करने से साइबर अपराध पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। संगठित गिरोह अपराधी गतिविधियों के लिए दूसरे मैसेजिंग ऐप्स, निजी सर्वर या एन्क्रिप्टेड ईमेल का सहारा ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने के बजाय संदिग्ध चैनलों पर लक्षित कार्रवाई (Targeted Action) अधिक प्रभावी उपाय हो सकती थी।

VPN से मिल सकती है राह? तकनीकी रूप से यह ब्लॉकिंग किस स्तर की है, यह महत्वपूर्ण है। यदि केवल ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) स्तर पर रोक लगाई गई है, तो कई यूजर्स VPN, प्रॉक्सी सर्वर या अन्य तकनीकी तरीकों से इसे एक्सेस करना जारी रख सकते हैं। हालांकि, सरकार यदि सख्त तकनीकी ब्लॉकिंग लागू करती है, तो सामान्य यूजर्स के लिए इस तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

निष्कर्ष NTA ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे कैलिब्रेटेड (सावधानीपूर्वक मापा गया) कदम बताया है। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि क्या यह अस्थायी प्रतिबंध परीक्षा को सुरक्षित बनाने में कितना सफल होता है और क्या सरकार आने वाले समय में पेपर लीक के असली मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने में कामयाब हो पाती है।

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