जापान के केंद्रीय बैंक (Bank of Japan) ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाते हुए ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के साथ ही जापान में बेंचमार्क ब्याज दर बढ़कर 1 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है, जो 1995 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
फैसले के पीछे की मुख्य वजह बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति समिति ने 7-1 के बहुमत से इस बदलाव को मंजूरी दी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब जापान कमजोर येन, बढ़ती ऊर्जा लागत और लगातार बढ़ती महंगाई के दबाव से जूझ रहा है। बैंक का मानना है कि क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें अब उपभोक्ता कीमतों (CPI) को प्रभावित कर रही हैं, जो उनके 2 प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर सकती हैं।
बाजार से लिक्विडिटी घटाने की तैयारी ब्याज दरों में इजाफे के साथ ही बैंक ने सरकारी बॉन्ड खरीद कार्यक्रम में भी बड़ी कटौती का ऐलान किया है। बैंक मार्च 2027 तक हर तिमाही अपनी मासिक बॉन्ड खरीद को लगभग 200 अरब येन कम करेगा। इसके बाद मासिक खरीद के स्तर को 2 ट्रिलियन येन पर सीमित कर दिया जाएगा। इसका सीधा मकसद बाजार से अतिरिक्त नकदी को कम करना है।
सस्ते पैसे की नीति खत्म दशकों तक जापान अपनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए शून्य या नकारात्मक ब्याज दर वाली नीति पर चल रहा था। लेकिन अब बैंक का यह रुख संकेत दे रहा है कि जापान अपनी पुरानी सस्ते पैसे (Easy Money) वाली नीति से पूरी तरह बाहर निकल रहा है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी मौद्रिक नीति को और सख्त (Hawkish) किया जा सकता है।
भारत और वैश्विक बाजारों पर क्या होगा असर? जापान की इस नई नीति का असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर पड़ना तय है। वर्षों से निवेशक जापान से कम ब्याज दर पर येन उधार लेकर अन्य देशों में निवेश करते रहे हैं, जिसे कैरी ट्रेड कहा जाता है।
अब जापान में ब्याज दरें बढ़ने से यह रणनीति महंगी और कम आकर्षक हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी निवेश (FPI) में कमी आ सकती है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का यह कदम वैश्विक वित्तीय परिदृश्य को बड़े बदलाव की ओर ले जा रहा है।
BREAKING: Bank of Japan hikes rates to highest level since 1995https://t.co/WYYjNrGUF1 pic.twitter.com/CVGdjgCnQa
— Nikkei Asia (@NikkeiAsia) June 16, 2026
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