महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर वही पुरानी पटकथा दोहराई जा रही है, जिसने 2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार की नींव हिला दी थी। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के 9 में से 7 सांसदों के बागी होने की चर्चा ने मातोश्री में खलबली मचा दी है। दिल्ली से मुंबई तक फोन की घंटियां घनघना रही हैं और राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी फिर एक बड़े बिखराव की ओर बढ़ रही है?
पार्टी में बगावत की सुगबुगाहट को खुद संजय राउत ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट से हवा दी। उन्होंने त्रिपुरा की एक छोटी पार्टी में टीएमसी सांसदों के विलय का उदाहरण देते हुए लिखा कि महाराष्ट्र के दलबदलुओं को भी बचने के लिए ऐसे ही किसी कुंडू की तलाश होगी। यह दलबदल कानून से बचने की उस रणनीति का संकेत माना जा रहा है, जिसे शिंदे गुट ने पहले इस्तेमाल किया था।
उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में 9 में से केवल 4 सांसद ही शारीरिक रूप से मौजूद थे। बाकी 5 सांसद या तो नदारद रहे या ऑनलाइन जुड़े होने का दावा किया गया। दिलचस्प बात यह है कि ये वही 5 सांसद हैं, जो एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी बधाई देने नहीं पहुंचे थे। उद्धव ठाकरे ने इन अनुपस्थित सांसदों से अपना रुख स्पष्ट करने के लिए दो दिन का समय दिया है।
इस बीच, अनुपस्थित सांसद संजय देशमुख का शिंदे गुट के मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलना चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, उद्धव गुट इसे निजी मुलाकात बताकर डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम गहराता जा रहा है। विपक्षी खेमे (शिंदे गुट) ने इसे उद्धव गुट का अंदरूनी मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन वे अंदर ही अंदर ऑपरेशन टाइगर के सफल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे के बयान ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है। उन्होंने 19 जून को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस समारोह में अपनी उपस्थिति को लेकर अनिश्चितता जताई है। स्थापना दिवस का यह कार्यक्रम उद्धव ठाकरे के लिए अपनी ताकत दिखाने का बड़ा मंच था, लेकिन यदि उनके सांसद ही इससे दूरी बनाते हैं, तो यह ठाकरे के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा।
संजय राउत अब भी सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की एकजुटता की बात कर रहे हैं। उनका दावा है कि सांसदों ने परिवार की शपथ ली है। लेकिन, एक निजी बातचीत में राउत का यह मान लेना कि पहले वालों ने भी कसम खाई थी, पार्टी के भीतर व्याप्त असुरक्षा और अविश्वास को साफ दर्शाता है। क्या 19 जून को उद्धव खेमे में कोई बड़ा धमाका होगा? यह देखना बाकी है।
हास्य जत्रा:
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 15, 2026
हे महाशय आहेत शिऊ कुंडू
नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी चे संस्थापक अध्यक्ष,(त्रिपुरा)
यांच्याच “पार्टी त तृणमूलच्या २२ खासदारांनी स्वतःला विलीन करून घेतले!
महाराष्ट्रातील फुटीरांना देखील अशाच एका कुंडू चा शोध घ्यावा लागेल!
घटनेतील १० वे अनुच्छेद तेच सांगतेय!
जय हो ! pic.twitter.com/IntLHHpsOK
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