राजनीति में एक कहावत है कि न तो कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही कोई स्थायी दुश्मन। आज देश की राजनीति में विलय का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। कभी कांग्रेस से अलग होकर अपनी पहचान बनाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शरद पवार की NCP अब उसी कांग्रेस में विलीन होने की अटकलों का सामना कर रही हैं।
सुप्रिया सुले के बयान से तेज हुई सुगबुगाहट इस चर्चा की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने कांग्रेस से निकली पार्टियों को घर वापसी की सलाह दी। इस पर शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने सकारात्मक रुख दिखाया, जिसके बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में महामर्जर की चर्चा गर्म है।
आपदा में अवसर तलाश रही कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस और NCP (शरद पवार गुट) दोनों ही पार्टियां इस समय अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। ममता बनर्जी की पार्टी अंदरूनी बगावत और विधायकों के मोहभंग से कमजोर हुई है, वहीं महाराष्ट्र में चुनाव चिह्न गंवाने के बाद शरद पवार गुट की जमीन भी पहले जैसी नहीं रही।
कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा अवसर है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां कांग्रेस बीते कुछ दशकों में हाशिए पर चली गई थी, वहां इन दलों का विलय उसे दोबारा राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य विपक्षी दल के रूप में मजबूती दे सकता है।
विधानसभा चुनाव के आंकड़े और बदलती हकीकत क्या ये पार्टियां आज कांग्रेस के लिए उतनी ही फायदेमंद हैं, जितनी पहले थीं? महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे इसका जवाब देते हैं। लोकसभा में 8 सीटें जीतने वाला शरद पवार का गुट विधानसभा में मात्र 10 सीटों पर सिमट गया, जबकि अजित पवार के गुट ने 41 सीटें हासिल कीं। यह दर्शाता है कि शरद पवार गुट अब उतना शक्तिशाली नहीं रहा जितना 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिख रहा था। टीएमसी की स्थिति भी कुछ इसी तरह की है, जहाँ पार्टी के भीतर पकड़ ढीली पड़ रही है।
कांग्रेस का इतिहास: बिखराव से जुड़ाव तक कांग्रेस का इतिहास विभाजन का रहा है। आजादी के बाद से अब तक 60 से अधिक पार्टियां कांग्रेस से अलग होकर बनी हैं। मोरारजी देसाई से लेकर इंदिरा गांधी के दौर तक, कई प्रधानमंत्री ऐसे रहे जिन्होंने शुरुआत कांग्रेस से की थी।
यदि कांग्रेस से निकली ये तमाम पार्टियां (TMC, NCP, YSR कांग्रेस आदि) वापस एक साथ आती हैं, तो संसद में कांग्रेस का संख्या बल 140 के करीब पहुंच सकता है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या ये दल अपनी अलग पहचान खोकर फिर से पुराने कांग्रेस परिवार में शामिल होने को तैयार होंगे, और क्या इससे कांग्रेस वाकई अपनी खोई हुई सत्ता वापस पा सकेगी? यह विश्लेषण का विषय है, लेकिन इतना तय है कि 2024 के बाद कांग्रेस अपनी पुरानी जमीनों को वापस पाने के लिए किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रही है।
#DNAमित्रों | क्षेत्रीय दलों की आपदा..कांग्रेस के लिए अवसर?..शरद पवार की पार्टी का कांग्रेस में विलय होगा?#DNA #DNAWithRahulSinha #SharadPawar #MamataBanerjee #Congress @rahulsinhatv pic.twitter.com/TkcxZWGYAh
— Zee News (@ZeeNews) June 12, 2026
जिनके दिल में काबा, वे बाबा के साथ पी रहे चाय : ओवैसी ने ममता-अखिलेश पर साधा निशाना
IND W vs PAK W: टी20 वर्ल्ड कप में महामुकाबला, आंकड़ों की जंग में कौन है आगे?
स्लोवाकिया में पीएम मोदी का ब्रेड और नमक के साथ भव्य स्वागत, ऐतिहासिक दौरे पर टिकीं दुनिया की नजरें
टीएमसी में बड़ी बगावत का दावा: जिन 20 सांसदों ने छोड़ी पार्टी, उसी दल के मुखिया ने कर दिया चौंकाने वाला खुलासा
ईरान-अमेरिका शांति समझौता: मिडिल ईस्ट में थमा जंग का शोर, होर्मुज जलडमरूमध्य होगा बहाल
नीट री-एग्जाम: एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के चक्कर में फीस रिफंड गंवा रहे छात्र, क्या NTA का नया जाल ?
केन विलियमसन की जगह अब विल यंग संभालेंगे मोर्चा, इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले बड़ा फैसला
पाकिस्तान: सड़क पर गिरकर गोला बना लड़ाकू विमान, CCTV में कैद हुए आखिरी पल
बंजी जंपिंग बनी मौत का जाल: रस्सी बांधना भूले स्टाफ, 115 फीट नीचे गिरी 21 साल की युवती
क्या अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान भारत के लिए एक खतरनाक चेतावनी है?