क्या पीएम मोदी के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं रेवंत रेड्डी? बीजेपी के इस खुफिया गेम प्लान से कांग्रेस में खलबली!
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नीति आयोग की बैठक के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी की मुलाकात ने देश की राजनीति का पारा बढ़ा दिया है। इस मुलाकात की तस्वीरों और दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं, बल्कि बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

तस्वीरों का सियासी संदेश और कांग्रेस की चिंता सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों में पीएम मोदी और रेवंत रेड्डी की केमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि रेवंत रेड्डी का सम्मान और पीएम मोदी का आत्मविश्वास कांग्रेस हाईकमान के लिए बेचैनी पैदा कर रहा है। कांग्रेस को डर है कि कहीं बड़े भाई वाला संबोधन और ये करीबी रिश्ते रेवंत को दिल्ली दरबार से दूर न कर दें।

मीनाक्षी नटराजन विवाद: शक के घेरे में सीएम? हाल ही में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के मामले ने आग में घी डालने का काम किया है। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि कांग्रेस की अंदरूनी जानकारी लीक हुई थी। इस पर बीआरएस ने आरोप लगाया है कि यह जानकारी रेवंत रेड्डी की मिलीभगत के बिना लीक नहीं हो सकती थी। इस विवाद ने पार्टी के अंदरूनी कलह को सतह पर ला दिया है।

केटीआर का गंभीर आरोप: जोड़ी सरकार का दावा बीआरएस वर्किंग प्रेसिडेंट केटी रामा राव (केटीआर) ने इसे मोदी-रेवंत जोड़ी सरकार करार दिया है। केटीआर का आरोप है कि केंद्र की बीजेपी सरकार और राज्य की कांग्रेस सरकार के बीच गुप्त तालमेल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस पीएम मोदी ने चुनाव के दौरान रेवंत रेड्डी पर आरआर टैक्स के गंभीर आरोप लगाए थे, वे अब चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

2028 के चुनाव के लिए बीजेपी का मास्टर प्लान पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीजेपी का असली लक्ष्य 2028 का विधानसभा चुनाव है। बीजेपी का गेम प्लान साफ है—रेवंत रेड्डी को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में संदिग्ध बनाना। अगर कांग्रेस और रेवंत के बीच खाई बढ़ती है, तो राज्य में कांग्रेस का आधार कमजोर होना तय है।

क्या रेवंत खेल रहे हैं कोई बड़ी चाल? विश्लेषक तेलकपेल्ली रवि के अनुसार, फिलहाल रेवंत रेड्डी पार्टी बदलने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि इससे उनकी कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी। हालांकि, रेवंत भी इस नैरेटिव का विरोध नहीं कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे दिखाना चाहते हैं कि राज्य के विकास के लिए उनके संबंध सभी के साथ मधुर हैं। लेकिन क्या यह संतुलन उन्हें कांग्रेस में बचाए रखेगा या फिर वे धीरे-धीरे बीजेपी के बुने हुए चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं? यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।

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