रोहतक: एक सरकारी स्कूल में बच्चों को शिक्षा देने वाली शिक्षिका सुलेखा दलाल इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उन्हें विभाग ने सस्पेंड कर दिया है। सुलेखा का आरोप है कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट वजह के नौकरी से निकाला गया है।
कौन हैं सुलेखा दलाल? मूल रूप से बहादुरगढ़ की रहने वाली सुलेखा दलाल रोहतक के रेनकपुरा सरकारी मिडिल स्कूल में पिछले 19 वर्षों से जेबीटी टीचर के तौर पर कार्यरत थीं। 6 जून 2026 को वे दिल्ली में हुए एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुईं और 10 जून को उन्हें फोन के जरिए निलंबन की जानकारी दी गई।
एक मां का दर्द : बेटे का भविष्य और सिस्टम की मार सुलेखा बताती हैं कि वह किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करने नहीं, बल्कि एक मां के तौर पर अपने बेटे के लिए न्याय मांगने गई थीं। उनके 21 वर्षीय बेटे ने दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में 100 में से 75 अंक हासिल किए, लेकिन 82 की कट-ऑफ होने के कारण वह चयन से चूक गया। बेटे की मेहनत का फल न मिलने और लगातार हो रहे पेपर लीक व धांधली से दुखी मां ने सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद की।
बिना नोटिस एकतरफा कार्रवाई पर उठे सवाल सुलेखा दलाल ने शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें जो सस्पेंशन लेटर मिला, उसमें निलंबन का कोई ठोस कारण दर्ज नहीं है। बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ऐसी कार्रवाई करना नियमों के विपरीत है। सुलेखा ने साफ किया कि वह शिक्षा विभाग छोड़ना नहीं चाहतीं, क्योंकि पढ़ाना उनका धर्म और कर्म है।
राजनीति में आने पर क्या बोलीं सुलेखा? अपने निलंबन के बाद मिल रहे राजनीतिक ऑफर्स पर सुलेखा ने स्पष्ट किया कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। उनके परिवार में पिछली सात पीढ़ियों से कोई राजनीति में नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने और सर्व कर्मचारी संघ के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगी।
सरकार और पार्टी में टकराव इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने सुलेखा के निलंबन को असंवैधानिक करार दिया है। पार्टी का कहना है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन से इतनी असुरक्षित हो गई है कि वह अब नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को छीन रही है।
फिलहाल, सुलेखा दलाल का मामला अब सिर्फ एक शिक्षक के निलंबन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह बेरोजगारी, युवाओं के भविष्य और सरकारी कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर जारी बड़ी बहस में बदल गया है। अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार अपना यह विवादास्पद फैसला वापस लेगी।
*Government revokes suspension of teacher Sulekha Dalal https://t.co/qdqsHWMH6t pic.twitter.com/ZpWlurVHSe
— ashokdanoda (@ashokdanoda) June 12, 2026
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