ममता बनर्जी पर FIR: बंगाल की राजनीति में भूचाल, क्या TMC बिखराव के कगार पर?
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल का दौर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है।

भड़काऊ बयान और कानूनी शिकंजा

कोलकाता के हेयर स्ट्रीट पुलिस थाने में ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने 2026 के चुनावों को लेकर आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम में भड़काऊ और सांप्रदायिक टिप्पणियां की थीं। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया अभी शुरूआती चरण में है, लेकिन चुनावी माहौल में इस कदम ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।

पार्टी के भीतर बगावत की आग

ममता बनर्जी की चिंता सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि संगठनात्मक भी है। टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ चुका है। खबर है कि विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 80 में से 58 विधायक बागी तेवर अपना चुके हैं। यह बगावत अब संसद तक पहुंच गई है, जहां पार्टी के 19 सांसद मौजूदा नेतृत्व से अलग रुख अपनाते दिख रहे हैं। चर्चा है कि ये सांसद अपना अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं।

नेता प्रतिपक्ष पर कानूनी लड़ाई

पार्टी की आंतरिक खींचतान अब अदालतों में पहुंच गई है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के निर्णय को टीएमसी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष का चयन पार्टी के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि विधानसभा अध्यक्ष के। इस कानूनी विवाद ने पार्टी के अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है।

अभिषेक बनर्जी पर भी कसता शिकंजा

मुश्किलें सिर्फ ममता तक सीमित नहीं हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी जांच एजेंसियों का सामना करना पड़ रहा है। सीआईडी ने उन्हें कथित जाली हस्ताक्षर मामले में 14 जून को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। पहली पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण जांच एजेंसियां अब उन पर शिकंजा कस रही हैं।

चुनावी भविष्य पर मंडराते सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के लिए यह अस्तित्व के संकट का समय है। एक तरफ पार्टी के भीतर टूट की खबरें हैं, दूसरी तरफ शीर्ष नेतृत्व कानूनी घेरे में है। विपक्ष को अब सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका मिल गया है। अगले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि ममता बनर्जी अपनी गिरती पकड़ को फिर से मजबूत कर पाती हैं या बंगाल में टीएमसी का कायापलट होने वाला है।

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