देश की राजनीति में इन दिनों एक बड़े महाविलय की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्षी दलों के भीतर कांग्रेस में विलय की चर्चाएं जोरों पर हैं। नाना पटोले और संजय राउत जैसे दिग्गजों के बयानों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।
नाना पटोले का दावा: एकजुट होने की बनी मानसिकता महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शरद पवार की पार्टी कांग्रेस के साथ आने की मनःस्थिति बना रही हैं। पटोले का मानना है कि संविधान और देश को बचाने के लिए वोटों का बंटवारा रोकना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा, विचारधारा से जुड़े सभी दलों को अब कांग्रेस के साथ एक मंच पर आ जाना चाहिए।
संजय राउत ने शरद पवार को सौंपी जिम्मेदारी शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस कवायद को एक कदम आगे बढ़ाते हुए कहा कि शरद पवार को इन दलों के विलय में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। राउत का तर्क है कि यदि कांग्रेस से अलग हुए सभी दल फिर से एक हो जाते हैं, तो यह भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी। उन्होंने कांग्रेस को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।
अशोक गहलोत की घर वापसी की अपील राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बहस में एक और बड़ा बयान जोड़ दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस से अलग होकर बनी सभी पार्टियों को अब वापस कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। गहलोत ने यह भी आह्वान किया कि सभी को पूरे दिल से राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना चाहिए।
सुप्रिया सुले का दिलचस्प जवाब विलय की इन खबरों के बीच सुप्रिया सुले ने अपने सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया दी। विलय के सवाल पर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, अभी बारिश होने तो दो, फिर देखेंगे कि छतरी लेनी है या रेनकोट। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी टीएमसी के साथ मजबूती से खड़ी है और ममता बनर्जी की विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता।
क्या है विलय के पीछे की असली वजह? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल और अन्य राज्यों में हाशिए पर जा रहे क्षेत्रीय दलों के लिए इंडिया गठबंधन के भीतर अस्तित्व बचाए रखना एक बड़ी चुनौती है। यदि पर्दे के पीछे चल रही यह पटकथा हकीकत में बदलती है, तो भारतीय राजनीति में ध्रुवीकरण का एक नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी दल वाकई अपनी क्षेत्रीय पहचान छोड़कर कांग्रेस के झंडे तले एकजुट होंगे।
All regional parties that separated from Congress should rejoin and wholeheartedly accept Sh. @RahulGandhi as their leader.
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 12, 2026
I believe that what Sanjay Raut has said has merit. The time has come. Now the fight is to save democracy. When we are all in the battlefield fighting to… pic.twitter.com/8fDy8zevEc
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