तीन साल के संघर्ष के बाद थाई राजकुमारी बज्रकितियाभा का निधन, भारत ने जताया गहरा शोक
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थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा नरेन्द्रदेब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। राजकुमारी पिछले तीन वर्षों से कोमा में थीं और बैंकॉक के किंग चुलालोंगकोर्न मेमोरियल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 11 जून 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली।

भारत ने दी श्रद्धांजलि

राजकुमारी के निधन पर भारत ने गहरा दुख व्यक्त किया है। बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास ने एक संदेश जारी कर कहा कि इस कठिन समय में भारत की संवेदनाएं थाई शाही परिवार और वहां की जनता के साथ हैं। दूतावास ने जोर देकर कहा कि कूटनीति और जनसेवा के क्षेत्र में राजकुमारी द्वारा छोड़े गए योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

ट्रेनिंग के दौरान बिगड़ी थी तबीयत

राजकुमारी बज्रकितियाभा को 15 दिसंबर 2022 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे उस समय नाखोन राचासीमा प्रांत में अपने पालतू कुत्ते के साथ ट्रेनिंग कर रही थीं, तभी दिल से जुड़ी समस्या के कारण वे अचानक गिर पड़ी थीं। डॉक्टरों के अनुसार, बड़ी आंत की सूजन के कारण उन्हें गंभीर संक्रमण हो गया था, जिसने धीरे-धीरे उनके शरीर के कई अंगों को प्रभावित किया।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

थाई सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि की है। राजा महा वजिरालोंगकोर्न ने निर्देश दिए हैं कि शाही परंपरा के अनुसार राजकुमारी को सर्वोच्च सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए। उनके पार्थिव शरीर को बैंकॉक के ग्रैंड पैलेस में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

कानून और समाज सेवा में अमूल्य योगदान

राजकुमारी बज्रकितियाभा का जन्म 7 दिसंबर 1978 को हुआ था। उन्होंने अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की थी। वे सामाजिक सुधारों, विशेषकर महिला कैदियों के पुनर्वास के लिए चलाए गए कमलंगजाई (इंस्पायर) अभियान के लिए जानी जाती थीं।

उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप ही संयुक्त राष्ट्र ने 2010 में बैंकॉक नियम अपनाए थे, जो महिला कैदियों के अधिकारों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक बने। वे ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं और संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की सद्भावना दूत के रूप में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।

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